अगर सुपर एरिया के नाम पर बिल्डर लगाए चूना तो क्या करें, फ्लैट लेने वालों को जरूर जाननी चाहिए ये बातें

नई दिल्ली : घर या फ्लैट खरीदने से पहले कई सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। बिल्डर कहीं कहीं कोई हिडन या अडिशनल चार्ज तो नहीं कर रहा? सुपर एरिया के नाम पर उल्लू तो नहीं बना रहा? गुरुग्राम की जेएमडी गार्डन सोसाइटी के फ्लैट बायर्स के साथ ऐसा ही हुआ। बिल्डर ने उनसे सुपर एरिया के नाम पर पैसे वसूल लिए। लेकिन बुधवार को नैशनल कंज्यूमर डिस्पुट रिड्रेसल कमिशन (NCDRC) का फैसला 480 फ्लैट बायर्स के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया। आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह फ्लैट बायर्स से सुपर एरिया के नाम पर जो रकम वसूली उसे ब्याज समेत वापस करे। ‘हक की बात’ (Haq Ki Baat) सीरीज में आइए जानते हैं कि अगर बिल्डर सुपर एरिया के नाम पर आपसे रकम वसूले तो क्या करें? आखिर ये सुपर एरिया, कारपेट एरिया, बिल्ट अप एरिया है क्या?

2016 में बने रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (RERA) कानून के मुताबिक, बिल्डर के लिए अनिवार्य है कि वे फ्लैट या अपार्टमेंट का साइज कारपेट एरिया के आधार पर बताएं। यानी कीमत भी कारपेट एरिया से तय होगी न कि बिल्ड-अप या सुपर बिल्ड-अप एरिया से। हां, लिफ्ट, सीढ़ी जैसे कॉमन एरिया के लिए बिल्डर मैंटिनेंस वसूल सकता है। अब गुरुग्राम के सोसाइटी का मामला देखते हैं। जेएमडी गार्डन सोसाइटी के फ्लैट बायर्स से बिल्डर ने सुपर एरियाके नाम पर पैसे वसूले। इसके खिलाफ सोसाइटी की रेजिडेंट वेल्फेयर असोसिएशन उपभोक्ता आयोग पहुंच गई। 8 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार NCDRC ने आरडब्लूए के पक्ष में फैसला दिया। आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह फ्लैट बायर्स से वसूली गई अतिरिक्त रकम को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करे।

कारपेट एरिया क्या है
ऊपर कारपेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और सुपर एरिया जैसे शब्द आए हैं। उनका मतलब समझना जरूरी है। सबसे पहले बात कारपेट एरिया की। यह वह एरिया है जिसका आप कारपेट यानी कालीन बिछाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। आसान शब्दों में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कारपेट एरिया ही वह जगह है जिसका आप अपने घर में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें सीढ़ियां, लिफ्ट, लॉबी, बाहरी दीवारें, टेरेस वगैरह नहीं आते। हालांकि, फ्लैट के अंदर की दीवारें कारपेट एरिया में आती हैं।

बिल्ट-अप एरिया क्या है

बिल्ट-अप एरिया में कारपेट एरिया के अलावा दीवारों की ली गई जगह भी शामिल होती है। इसके अलावा इसमें बालकनी, टेरेस, फ्लावर बेड जैसे वे एरिया भी आते हैं जो आमतौर पर इस्तेमाल में नहीं आते। यानी बिल्ट-अप एरिया हमेशा कारपेट एरिया से ज्यादा होता है।

सुपर बिल्ट-अप एरिया क्या है
अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी में ऐसी तमाम जगहें होती हैं जिनका इस्तेमाल सभी करते हैं जैसे लॉबी, लिफ्ट, स्विमिंग पुल, गार्डन, पार्क वगैरह। बिल्ट-अप एरिया में इन कॉमन एरिया को जोड़कर सुपर बिल्ट-अप एरिया बनता है। यानी सुपर बिल्ट-अप एरिया = बिल्ट-अप एरिया+कॉमन एरिया

बिल्डर के खिलाफ कैसे करें शिकायत
अगर बिल्डर ने वादाखिलाफी की है या गैरवाजिब पैसे वसूले हैं या उससे किसी अन्य तरह की शिकायत है तो इसे कहां और कैसे दर्ज कराएं? इसका जवाब है रेरा या फिर उपभोक्ता आयोग में। फ्लैट बायर बिल्डर के खिलाफ रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (RERA) में शिकायत दर्ज करा सकता है। लेकिन अगर फ्लैट 2016 में रेरा कानून लागू होने से पहले खरीदा गया है तो उसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट, 1986 के तहत ही शिकायत दर्ज करानी पड़ेगी।

बिना वकील दर्ज करा सकते हैं शिकायत
अगर आपको फ्लैट को लेकर बिल्डर से किसी तरह की शिकायत है तो आप कंज्यूमर कोर्ट में उसे दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए किसी वकील की सेवा लेने की भी जरूरत नहीं है। इसकी प्रक्रिया भी आसान है। आइए स्पेट बाइ स्टेप समझते हैं शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया।

सबसे पहले बिल्डर को नोटिस भेजे
कंज्यूमर कोर्ट में बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से पहले आपको उसे एक नोटिस भेजना होगा। उसमें बताएं कि आपकी शिकायतें क्या हैं। अगर वह इस पर भी आपकी शिकायत दूर नहीं करता तब आप कंज्यूमर कोर्ट जा सकते हैं।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं
बिल्डर आपके नोटिस का जवाब नहीं देता है तो अगला चरण है उसके खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराना। आप सरकार की कंज्यूमर हेल्पलाइन वेबसाइट पर जाकर इसे रजिस्टर कर सकते हैं। साइट पर साइन अप/लॉग इन के बाद आप पर्सनल और प्रोजेक्ट से जुड़े डीटेल भरने की जरूरत होगी। इन डीटेल को भरकर अपनी शिकायत का ब्यौरा दीजिए और उसके समर्थन में जरूरी डॉक्युमेंट अपलोड कर दीजिए।

आप पजेशन में देरी, कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिलने, घटिया निर्माण, बिना जरूरी मंजूरी के निर्माण, प्रॉपर्टी फ्रॉड, हिडन चार्ज, लैंड यूज या ले आउट प्लान में बदलाव जैसी शिकायतें कर सकते हैं।

फीस
शिकायत से जुड़ा ब्यौरा भरने के बाद आपको फीस जमा करनी होगी। शिकायत के लिए लगने वाली फीस मामले की रकम पर निर्भर करता है। जैसे, शिकायत का मामला अगर 1 लाख रुपये तक का है तो आपको 100 रुपये फीस चुकानी होगी। अगर 1 करोड़ रुपये तक की शिकायत है तो 4000 रुपये फीस देनी होगी।

1 लाख रुपये तक – 100 रुपये
1-5 लाख तक- 200 रुपये
5-10 लाख रुपये तक – 400 रुपये
10-20 लाख रुपये तक – 500 रुपये
20-50 लाख रुपये तक – 2000 रुपये
50 लाख-1 करोड़ रुपये तक – 4000 रुपये

अगर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी तो NCDRC में होगी शिकायत
अगर प्रॉपर्टी की कीमत 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो शिकायत के लिए नैशनल कंज्यूमर डिस्पुट रिड्रेसल कमिशन (NCDRC) में जाना होगा। इसके लिए 5000 रुपये की फीस चुकानी पड़ेगी।

शिकायत के स्टेटस को ऑनलाइन करें चेक
शिकायत दर्ज कराने के बाद आपको डॉकेट नंबर मिलता है। शिकायत का स्टेटस चेक करने के लिए आपको कंज्यूमर हेल्पलाइन वेबसाइट पर डॉकेट नंबर और अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालना होगा।

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