Vinod Kambli Birthday | विनोद कांबली : गुरु ने जिसे माना सचिन तेंदुलकर से भी बेहतर, लेकिन वक्त से पहले ऐसे खत्म हो गया करियर

नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली (Happy Birthday Vinod Kambli) आज 51 साल के हो गए हैं। विनोद कांबली क्रिकेट की दुनिया का एक जाना माना चेहरा हैं। उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन, उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। टैलेंटेड होने के बावजूद भी वह कुछ खास कमाल नहीं कर पाए। तो चलिए आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें…

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विनोद कांबली (Vinod Kambli) का जन्म 18 जनवरी 1972 को मुंबई के कंजुरमार्ग स्थित इंदिरा नगर में हुआ था। उनके पिता गणपत कांबली एक मैकेनिक हुआ करते थे। विनोद के पिता बहुत मुश्किल से 7 लोगों के परिवार का पालन-पोषण करते थे। विनोद कांबली का क्रिकेट करियर छोटा, लेकिन दमदार और रिकॉर्ड्स से भरा रहा। सचिन के बचपन के दोस्त कांबली ने मुंबई की मशहूर कांगा लीग में उनके साथ ही डेब्यू किया था।  

विनोद कांबली (Vinod Kambli) ने 16 साल की उम्र में मास्टर ब्लास्टर ने सचिन तेंदुलकर (15) के साथ हैरिस शील्ड ट्रॉफी में 664 रनों की नाबाद और बेहतरीन पार्टनरशिप की थी। उस मैच में कांबली ने 349 रन और सचिन ने 326 रन बनाए थे। लेकिन खास बात यह है कि इस मैच में कांबली ने 37 रन देकर 6 विकेट भी चटकाए थे। शायद इसी वजह से रमाकांत आचरेकर भी कांबली को सचिन से ज्यादा टैलेंटेड मानते थे। लेकिन आज सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है और दूसरी तरफ कांबली की गिनती भारत के असफल क्रिकेटर्स में होती है।

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने भले ही एक साथ क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा। लेकिन, उन्हें अच्छी शुरुआत नहीं मिली। जहां सचिन ने 1988 में रणजी में गुजरात के खिलाफ मुंबई की ओर से डेब्यू किया था। वहीं, कांबली को रणजी में डेब्यू करने के लिए एक साल तक इंतजार करना पड़ा। 1989 में जब तेंदुलकर पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच खेल रहे थे, तब विनोद कांबली अंडर-19 यूथ कप में खेल रहे होते थे।

हालांकि, कांबली  (Vinod Kambli) ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई। उन्‍होंने इंटरनेशनल करियर का आगाज भी बड़े ही विस्‍फोटक अंदाज में किया। अपने शुरुआती 7 टेस्ट मैचों में उन्‍होंने चार शतक जड़ दिए थे। यही नहीं वह टेस्ट मैचों में सबसे तेज एक हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। 1994 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित किया था। 14 पारियों में 1000 टेस्ट रन पूरा करने वाले वह पहले भारतीय बने थे।

जी हाँ, वह सबसे जल्दी हजार रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। उनसे तेज केवल हर्बर्ट सटक्लफ, डॉन ब्रेडमैन और नील हर्वे थे।मगर फिर उनके सितारे उलटे चलने गए और एक उगता सूरज चमक बिखेरने से पहले ही डूब गया।

हैरानी की बात यह है कि, विनोद कांबली की टेस्ट में औसत सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से भी कहीं अधिक है। वहीं जिन बल्लेबाजों ने 20 टेस्ट पारियों या उससे अधिक में बल्लेबाजी की है, कांबली का औसत उनमें सबसे अधिक (54.20) है।

वहीं, कांबली  (Vinod Kambli) के बारे में यह भी कहा जाता है कि अचानक मिली सफलता से उन्हें जो स्टारडम मिला था, वे  उसे वह संभाल नहीं पाए। फिर उनकी कुछ खराब आदतों और बुरे व्यवहार के कारण उन्होंने खुद अपना करियर ख़राब कर दिया। यह सच है कि उन्‍होंने टीम से बाहर होने के बाद करीब 9 बार वापसी की थी, लेकिन वह कभी भी अपनी जगह को पक्की नहीं रख  पाए।

हालाँकि कांबली (Vinod Kambli) ने बाद में यह आरोप भी लगाया कि उनके कप्तान, टीम के अन्य साथी, चयनकर्ता और क्रिकेट बोर्ड की वजह से उनका करियर बर्बाद हुआ था। कारण जो भी रहा हो,लेकिन यह जरुर था कि, विनोद कांबली चाहते तो वे भारतीय क्रिकेट का एक और ध्रुव तारा बन सकते थे। फिर कौन जानें तब हमारे पास क्रिकेट के दो भगवान होते।

विनोद का इंटरनेशनल क्रिकेट में करियर 14 टेस्ट, 104 वनडे तक ही चला। इस दौरान उन्होंने टेस्ट में 227 रन के सर्वाधिक स्कोर के साथ 1084 रन बनाए जबकि वनडे में 2427 रन बनाए। टेस्ट में विनोद ने 4 जबकि वनडे में 2 शतकीय पारी खेली।

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