Saturday, September 24, 2022

नितिन गडकरी का मास्टर प्लान… अब पराली से बनेगी बायो CNG, प्रदूषण से निपटने की तैयारी

वेबवार्ता: Net Zero, Parali, BIO CNG: ग्रीनहाउस गैसों (Green house Gases) के बढ़ते खतरे के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पिछले साल ग्लासगो में आयोजित 26वें कॉप सम्मेलन में भारत के लिए साल 2070 तक भारत के नेट कार्बन-जीरो इकॉनमी हासिल करने का जो लक्ष्य रखा था, उसे लेकर पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन की दिशा में काम कर विभिन्न एजेंसियों ने सरकार के साथ मिलकर देश में जहरीली गैस उत्सर्जन करने वाले पांच क्षेत्रों के लिए उर्त्सजन में कटौती के मद्देनजर जलवायु लक्ष्य तय किए हैं।

मंगलवार को राजधानी दिल्ली में जलवायु परिवर्तन से जुड़े नेट जीरो (Net Zero And Usage Of Parali) की दिशा में तय किए जाने वाले लक्ष्यों को हासिल करने के मद़्देनजर इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लाइमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी फांउडेशन (ICCSA) की ओर से एक तकनीकी रोडमैप सामने रखा गया। आईसीसीएसए द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इन रोडमैप की श्रृखंला की शुभारंभ सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने किया।

‘नेट जीरो बड़ा टास्क ही नहीं चुनौती भी’

इस मौके पर गडकरी ने कहा कि नेट जीरो (Net Zero And Usage Of Parali) एक बड़ा टास्क ही नहीं, महती चुनौती भी है। लेकिन जिस तरह से भारत इस दिशा में काम कर रहा है, उसके मद्देनजर हमें पूरी उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। उन्होंने माना कि इसे लेकर सरकार पर खासा दबाव है, लेकिन वेल्यु ऑफ वेस्ट (कचरे का बेहतर इस्तेमाल) और वेस्ट टु वेल्थ (कचरे से पैसे बनाना) जैसे फॉर्मूले की मदद से हम इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

इस मौके पर गडकरी ने परिवहन के क्षेत्र में उत्सर्जन में कमी को लेकर हो रही कोशिशों को सामने रखते हुए कहा कि हम जल्द ही 27 ग्रीन हमसफर एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट पूरा करने जा रहे हैं, जिससे हमारी लॉजिस्टिक कॉफी कम हो जाएगी। इसी तरह अभी हम पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिला रहे हैं। लेकिन टोयोटा जल्दी एक ऐसी गाड़ी लेकर आ रही है, जो 100 फीसदी बायो एथनॉल से चलेगी।

पराली से बनेगी बायो सीएनजी- गडकरी

गडकरी का कहना था कि आज हम पराली से एक लाख लीटर बायो एथनॉल बना रहे हैं। लेकिन जल्द ही हम इससे बायो सीएनजी बनाने पर भी काम कर रहे हैं। वहीं गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की जरूरत करार देते हुए कहा कि अगर हमारे देश के 117 आकांक्षी जिलों में अगर इस तकनीक पर काम किया जाए तो उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने में पूरी मदद मिलेगी। इससे देश में रोजगार सृजन भी होगा।

आईसीसीएसए का मानना है कि नेट जीरो के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जो तकनीकी रोडमैप पेश किया जा रहा है, वह ट्रिपल ई (इकोनमी, एनवायरमेंट व इकोलॉजी) की अवधारणा पर आधारित है। इसके लिए सबसे ज्यादा ग्रीन हाउज गैस उत्सर्जन करने वाले जिन पांच सेक्टरों को चुना गया है, उनमें तेल व प्राकृतिक गैस, कृषि व पशुपालन, लैंडफिल एडं वेस्ट, कोयला खनन और परिवहन प्रमुख हैं।

आईसीसीएसए भारत सरकार के विभिन्न विभागों व अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इन्हीं सेक्टरों के मद्देनजर देश में कार्यकमों की एक श्रृंखला आयोजित करेगी, जहां रिसर्च व तकनीक की मदद से इनमें आने वाली चुनौतियों से निपटा जा सके।

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