Life insurance : अगर लैप्‍स हो जाए जीवन बीमा तो क्‍या है उसे चालू करने का तरीका

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New Delhi: अगर आप अपनी जीवन बीमा पॉलिसी (Life insurance) का प्रीमियम भरने से चूक गए हैं और पॉलिसी लैप्स (Lapse) हो गई है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। आप लैप्स हुई बीमा पॉलिसी (Life insurance) को फिर से सक्रिय करा सकते हैं। आइए जानते हैं LIC Policy Lapse होने का क्‍या मतलब है और इसे कैसे दोबारा शुरू कर सकते हैं।

आमतौर पर बीमा पॉलिसी (Life insurance) खरीदने के बाद हम छमाही या सालाना प्रीमियम (annual premium) भरते हैं। कुछ बीमा कंपनियां अब हर महीने भी प्रीमियम जमा करने का विकल्प मुहैया कराती हैं। अगर आप समय पर इसका भुगतान नहीं कर पाते हैं तो पॉलिसी लैप्स (Policy Lapse) हो जाती है। ऐसे में नई पॉलिसी खरीदने का ऑप्शन रह जाता है। यह पुरानी पॉलिसी से महंगी पड़ती है क्योंकि तब तक ग्राहक की उम्र ज्यादा हो जाती है, क्योंकि प्रीमियम ज्यादा देना पड़ता है।

myinsuranceclub.com के फाउंडर दीपक योहानन का कहना है कि बीमा कंपनियां पॉलिसी लैप्स हो जाने पर एक निश्चित ब्याज के साथ प्रीमियम (सभी बाकी किश्तें) चुकाने पर पॉलिसी को सक्रिय कर देती हैं। इसके अलावा बीमा कंपनी री-अंडरराइटिंग और हेल्थ चेकअप के लिए भी बोल सकती है। ऐसी स्थिति में सम एश्योर्ड भी घट सकता है।

अगर आप समय पर प्रीमियम नहीं चुकाते हैं तो और ट्रेडिशनल पॉलिसी है तो लैप्स पीरियड के खत्म होने पर यह पेड अप पॉलिसी बन जाती है। कई बीमां कंपनियां पेड अप पॉलिसी में सम एश्योर्ड घटा देती हैं। यह आपकी ओर से भुगतान किये गये प्रीमियम पर निर्भर करता है। साथ ही सम एश्योर्ड पॉलिसी के मैच्यौर होने पर ही मिलता है।

पॉलिसी लैप्स होने पर क्या करें

बीमा प्रीमियम का भुगतान करने से चूकने पर पॉलिसी को ग्रेस पीरियड में ट्रांसफर कर दिया जाता है। आमतौर पर बीमा कंपनियां छमाही या सालाना प्रीमियम होने पर उसके भुगतान के लिए एक 30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं। मासिक प्रीमियम होने पर 15 दिनों का ग्रेस पीरियड देती है।

इस ग्रेस पीरियड के दौरान पॉलिसीधारक प्रीमियम का भुगतान कर अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी को फिर से एक्टिव कर सकता है। अगर ग्रेस पीरियड में भी आप प्रीमियम का भुगतान नहीं कर पाते हैं तो पॉलिसी लैप्स हो जाती है। ऐसे में बेनिफिशयरी को पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद सम एश्योर्ड नहीं मिलेगा। लेकिन अगर ग्रेस पीरियड में पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो नॉमिनी को पूरा पैसा (सम एश्योर्ड) मिलता है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

1-पॉलिसी लैप्स होने पर प्रीमियम के अलावा ब्याज भी भरना पड़ता है

2-हेल्थ डेक्लरेशन, मेडिकल रिपोर्ट भी कंपनी मांग सकती है

3- जरूरी नहीं कि पॉलिसी के पुराने लाभ भी जारी रहेंगे यानी सम एश्योर्ड राशि घट भी सकती है

4-कई बीमा कंपनियां 6 महीने के भीतर लैप्स पॉलिसी सक्रिय कराने पर मेडिकल चेकअप की मांग नहीं करती हैं

Ordinary/Simple Revival of Insurance Policy

इस स्कीम में लैप्स पॉलिसी को आसानी से पुनर्जीवित (revive) किया जा सकता है। हां, प्रीमियम के साथ ब्याज भी भरना होगा। जरूरी है कि पॉलिसीधारक पॉलिसी लैप्से होने की तारीख से 6 महीने के अंदर-अंदर ऐसा कर लें। LIC उस व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई दस्तावेज नहीं मांगेगी जो बीमाधारक (Policy holder) है।

Medical Basis Policy Revival

ऐसी पॉलिसी, जिनका Ordinary Revival Scheme या Non-Medical Basis पर रिवाइवल नहीं हो सकता तब LIC द्वारा पूछे गए मेडिकल रिकॉर्ड और दूसरे सवालों का जवाब देकर आप फिर से पॉलिसी को पुनर्जीवित कर सकते हैं।

Special Revival Scheme of Policy

Policyholder रिवाइवल के समय आयु के मुताबिक एकल प्रीमियम का पेमेंट करेगा। विशेष पुनरुद्धार योजना का फायदा तभी उठा सकते हैं जब पूरा प्रीमियम चुकाते हैं। इस स्कीम के तहत, बीमा कंपनी अच्छे स्वास्थ्य और कुछ मेडिकल रिकॉर्ड की घोषणा करने के लिए आपसे कह सकती है।

Installment Revival Scheme of LIC Policy

यह बेहतर Revival plan है। यह योजना उन लोगों के लिए है जो प्रीमियम का भुगतान एकसाथ नहीं कर सकते। व्यक्ति Installment Revival Scheme का ऑप्शन चुनते हैं। अगर आप ये स्कीम चुनने जा रहे है तो कुछ तरीके हैं, जिनके माध्यम से आप इसे जारी रख सकते हैं।

  • yearly premium payment के लिए, व्यक्ति को वार्षिक भुगतान की रकम देनी होगी।
  • half-yearly premium payment में साल में दो बार प्र‍ीमियम दे सकते हैं।
  • quarterly premium payment में हर तिमाही प्रीमियम देना होता है।

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