Rules Change From 1st April: 1 अप्रैल से बदल रहे ये 5 नियम, जानें आपकी जेब पर होगा क्या असर

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Webvarta Desk: New Financial Year: 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होने जा रहा है। साथ ही इस दिन से कई नियमों (Rules Change From 1st April) में भी बदलाव हो रहे हैं जिनका सीधा आपकी जेब पर असर पड़ने वाला है। इनमें सैलरी स्ट्रक्चर, ईपीएफ योगदान और आईटीआर फाइलिंग शामिल है। जानते हैं कि इनका आप पर क्या असर होने जा रहा है।

बजट (Budget) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने टैक्स से जुड़ी कुछ प्रमुख घोषणाएं की थीं जो 1 अप्रैल से लागू (Rules Change From 1st April) होने वाली हैं।

अगले महीने से आईटीआर दाखिल करने वाले नियम, ईपीएफ अंशदान और टैक्सेशन से जुड़े नियम लागू होंगे। साथ ही आजाद भारत के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि ये नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

मूल वेतन के साथ बढ़ सकता है सीटीसी

सैलरी का नया नियम 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा है। सरकार की नई वेतन संहिता (New Wag Code) के मुताबिक, आपको हर महीने मिलने वाली पूरी रकम में वेतन का हिस्सा 50% होना चाहिए। वेतन के दायरे में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और Retaining Allowance आता है।

इन तीनों को जोड़कर मिलने वाली कुल राशि महीने में मिलने वाली कुल रकम की आधी होनी चाहिए। शेष आधी राशि में अन्य भत्ते शामिल होंगे। लेकिन अगर यह राशि 50% से अधिक हो गई तो अतिरिक्त रकम वेतन का हिस्सा मान ली जाएगी।

आज ज्यादातर कंपनियों का मूल वेतन लगभग 35% से 45% है, यह उनके लिए एक बदलाव होगा। नए नियम लागू होने पर आपके मूल वेतन के साथ-साथ आपका सीटीसी भी बढ़ सकता है।

LTC योजना में छूट

पिछले साल COVID-19 के प्रकोप के कारण केंद्र सरकार ने ने अवकाश यात्रा रियायत (LTC) योजना में छूट की घोषणा की थी। इस छूट ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 12 अक्टूबर, 2020 के बीच किए गए खर्चों पर आयकर लाभ का दावा करने की अनुमति दी। यात्रा खर्च के बदले 12 प्रतिशत या अधिक की जीएसटी दर वाली वस्तुओं की खरीद पर 31 मार्च, 2021 तक छूट ली जा सकती है। यह छूट 1 अप्रैल से लागू नहीं होगी।

रिटायरमेंट की राशि बढ़ेगी

सैलरी के नए नियम से ग्रैच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ेगा जिससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा। ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारियों के सैलरी में सबसे अधिक बदलाव आएगा और इसके चलते वो ही सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पीएफ और ग्रैच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी वृद्धि होगी। उन्हें कर्मचारियों के पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा। इनसे कंपनियों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी।

पीएफ के मिलने वाले ब्याज पर टैक्स

1 अप्रैल, 2021 से, 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक प्रॉविडेंट फंड के लिए ब्याज टैक्स लगेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इसकी घोषणा की थी।

इसका मतलब है कि 1 अप्रैल से, पीएफ खाते में प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक का योगदान करने वाले लोगों को 2.5 लाख रुपये की सीमा से अधिक की राशि पर अर्जित ब्याज पर कर का भुगतान करना होगा। डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के मुताबिक इसका मकसद कंट्रीब्यूटर्स के बीच असमानता को दूर करना और अमीरों को इसका दुरुपयोग करने से रोकना है।

बुजुर्गों के लिए आईटीआर फाइलिंग

75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयकर रिटर्न दाखिल करने से छूट दी जाएगी। यह छूट उन बुजुर्गों को मिलेगी जिनके पास केवल आय के स्रोत के रूप में पेंशन और ब्याज है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की छूट केवल उसी स्थिति में उपलब्ध होगी, जब ब्याज आय उसी बैंक में अर्जित की जाती है जहां पेंशन जमा की जाती है।

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