Maha Shivratri 2021: महाशिवरात्रि पर शिव चिह्नों से करें ये उपाय, दूर हो जाएगा दुर्भाग्य

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Webvarta Desk: Maha Shivratri 2021: अगर आपके जीवन में कुछ अच्‍छा नहीं चल रहा है। तमाम प्रयासों के बाद भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं तो इस महाशिवरात्रि (Shivratri or Mahashivratri 2021) पर आप अपनी तकलीफों को दूर कर सकते हैं।

इसके लिए आपको किसी विशेष पूजन की भी जरूरत नहीं है। केवल शिव चिह्नों से भी आप अपनी किस्‍मत संवार सकते हैं। आइए जानते हैं ज्‍योतिषशास्‍त्र में बताये गए इन उपायों के बारे में। हालांकि आपको इन सबको अपनाने की जरूरत नहीं है। किसी 1 से भी आपका दुर्भाग्‍य दूर हो सकता है।

बुरी नजर से बचाता है त्रिशूल

भोलेनाथ सदैव ही त्रिशूल धारण करते हैं। यह अत्‍यंत ही शुभ चिह्न होता है। ज्‍योतिष शास्‍त्र के मुताबिक यूं तो कभी भी लॉकेट में त्रिशूल पहनना शुभ होता है। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन इसे लॉकेट में पहनने से जातक पर कभी भी कोई भी मुसीबत नहीं आती।

इसके अलावा उसपर किसी भी बुरी नजर का प्रभाव नहीं होता। नकारात्‍मक ऊर्जा और भूत प्रेत उसे छू भी नहीं सकते। लेकिन हमेशा ध्‍यान रखें कि शिव केवल उसे ही स्‍वीकार करते हैं जिसके मन में किसी के भी प्रति कोई कपट या छल नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि इसे धारण करते समय मन में किसी भी तरह की गलत भावना नहीं होनी चाहिए।

डमरू बढ़ाता है एकाग्रता

डमरू भगवान शिव का प्रमुख अस्‍त्र है। इसे ज्‍योतिष शास्‍त्र में भी अत्‍यंत शुभ माना जाता है। मान्‍यता है कि डमरू का लॉकेट पहनने या फिर इसे घर में रखने से घर में किसी भी तरह की नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। यह व्‍यक्ति के जीवन से निराशा भी दूर करता है। इसके अलावा इसको पहनने से व्‍यक्ति के अंदर एकाग्रता बढ़ती है।

अगर किसी काम में मन नहीं लगता या फिर काम तमाम प्रयासों के बावजूद भी नहीं बनता तो डमरू पहनने से लाभ होता है। ज्‍योतिष के मुताबिक इसे शिवरात्रि के दिन धारण करना चाहिए। ध्‍यान रखें कि जब भी इसे पहने कभी भी किसी के भी प्रति मन में किसी भी तरह का ईष्‍या-द्वेष न रखें। अन्‍यथा यह फल नहीं देता।

नाग से होता है बाधाओं का नाश

यह तो सभी जानते हैं कि भगवान शिव त्रिशूल, डमरू की ही तरह नागों को भी सदैव अपने साथ रखते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र में इसे भी विशेष लाभकारी बताया गया है। कहा जाता है कि अगर किसी व्‍यक्ति के जीवन में या फिर घर-परिवार में लगातार परेशानियां ही परेशानियां आ रही हों। तो उसे महाशिवरात्रि के दिन नाग का लॉकेट पहनना चाहिए।

लेकिन ध्‍यान रखें कि इसे पहनने से पहले गंगाजल या फिर बहते हुए जल से धो लें। इसके बाद भोलेनाथ के किसी भी मंदिर में जाकर या फिर घर के ही पूजा-घर में धूप-दीप दिखाकर शिव जी के चरणों में रख दें। साथ ही प्रार्थना करें कि आप इसे विश्‍वास से धारण कर रहे हैं कि यह आपके जीवन आपके घर-परिवार की सारी परेशानियां दूर कर देगा।

बेलपत्र का लॉकेट लाता है सुख-समृद्धि

भोलेनाथ की पूजा में मुख्‍य रूप से अर्पित किये जाने वाले बेलपत्र की अपनी ही महिमा है। ज्‍योतिष शास्‍त्र में बताया गया है कि अगर इसे महाशिवरात्रि के दिन किसी चांदी के लॉकेट में डालकर लाल धागे में पहना चाहे तो यह आपके ऊपर हमेशा ही शिव की कृपा बनाए रखता है। इसे पहनने से जातक के जीवन और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

भगवान शिव की कृपा से जातक को कभी भी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन इसे भी निर्मल मन से धारण करना चाहिए। अन्‍यथा यह परिणाम नहीं देता।

आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है रूद्राक्ष

रूद्राक्ष भगवान शिव की आंख से निकले आंसुओं से बना है। यही वजह है कि इसको पहनने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही यह जातक के आत्‍मविश्‍वास को भी बढ़ाता है। यदि आप भी किसी ऐसी तकलीफ से जूझ रहे हैं तो बेहतर होगा कि महाशिवरात्रि के दिन लाल धागे में रूद्राक्ष धारण करें। इसे भी पहनने से पहले घर के पूजा घर या फिर किसी भी श‍िव मंदिर में धूप-दीप दिखाकर शिव जी के चरणों में रख दें।

इसके बाद भोलेनाथ से प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन में आने वाल सभी परेशानियों को दूर करके आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि करें। इस प्रार्थना के बाद भोलेनाथ पर पूरा विश्‍वास जताते हुए कि वह आपकी मुराद जरूरी पूरी करेंगे लॉकेट को धारण कर लें।

शिवलिंग पहनने से दूर होती हैं व्‍याधियां

भोलेनाथ को प्रिय अस्‍त्रों और अन्‍य अलंकारों के अलावा आप शिवलिंग का लॉकेट भी धारण कर सकते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र के मुताब‍िक यदि कोई गंभीर रूप से शारीरिक या फिर मानसिक तौर पर बीमार हो तो उसे शिवलिंग का लॉकेट पहनना चाहिए। ऐसा करने भोलेनाथ की कृपा से उसकी सेहत में जल्‍दी ही सुधार होने लगता है। वैसे तो किसी भी दिन यह लॉकेट पहना जा सकता है।

लेकिन महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का लॉकेट पहनने से तमाम व्‍याधियां दूर होती हैं। इसे पहनने के लिए किसी खास पूजा की जरूरत नहीं है। घर के पूजा घर या फिर किसी श‍िव मंदिर में इसे कुछ देर के लिए भोले के चरणों में अर्पित करें। अपनी व्‍याधियां दूर करने की विनती करें। इसके बाद इसे धारण कर लें। लेकिन ध्‍यान रखें कि इन शुभ चिह्नों को पहनते समय किसी भी व्‍यक्ति के लिए मन में कोई भी द्वेष भाव न लेकर आएं।

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