रमज़ान के आखिरी अशरे में नबी अकरम के विशेष कार्य…

0
126
ramadan

लेखक-मोहम्मद यासीन जहाज़ी

अनुवाद-अनवार अहमद नूर

पवित्र माह रमज़ान की अथाह बरकतें और विशेषताएं बयान की गई हैं। स्वयं नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रमज़ान उल मुबारक को तीन भागों में बांटा है। पहले दस दिन वाले हिस्से का नाम रहमत। दूसरे 10 दिन का नाम मगफिरत और तीसरे 10 दिन वाले भाग का नाम निजात रखा है। यूं तो नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पूरे रमज़ान इबादत किया करते थे और पूरे रमज़ान विशेषता के साथ दो काम किया करते थे सखावत और तिलावत।

हदीस शरीफ में है कि नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम लोगों में सबसे ज्यादा सखी थे लेकिन जब रमज़ान आता था तो आपकी सखावत बहुत बढ़ जाती थी। आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम सखावत के साथ साथ आम दिनों के मुकाबले रमज़ान में तिलावते कलाम पाक का अधिक एहतमाम फरमाया करते थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान की हर रात को तिलावत और तिलावत की साथ साथ सखावत फरमाया करते थे। हजरत इब्ने अब्बास रज़ि अल्लाह अन्हा फरमाते हैं कि सखावत तो नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के पूरे रमज़ान का मामूल था। साथ ही साथ आप आखिरी अशरे में कुछ ऐसे आमाल किया करते थे जो पहले दोनों अशरे में नहीं करते थे। वह कार्य निम्नलिखित हैं :

शब बेदारी यानि रात को जागना।

आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम आखिरी अशरे में शब बेदारी का विशेष एहतमाम फरमाते थे। जिसमें नमाज़, तिलावत, ज़िक्र और अस्तगफार किया करते थे।

अहलो अयाल यानि परिवार-खानदान वालों को बेदार किया करते थे। और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हज़रत अली व फातिमा रज़ि अल्लाह अन्हा का दरवाजा खटखटा कर कहा करते थे कि दोनों उठ जाओ और नमाज़ पढ़ो। (3) नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इस अशरे में पत्नियों से अलग रहा करते थे। और पूरी तरह इस वक्त में इबादत में मसरूफ रहते थे।

लैलतुल कद्र की तलाश।

शब बेदारी का मूलभूत उद्देश्य नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का यह था कि शबे कद्र को प्राप्त कर लें और आखिरी अशरे में इसकी संभावना अधिक होती है। रमज़ान के आखिरी अशरे में आप विशेष रूप से एतकाफ (एकांतवास) फरमाया करते थे। आखिरी अशरे में आपका एक कार्य यह भी था कि खाने की मात्रा बहुत कम कर दिया करते थे। यहां तक कि सिर्फ इफ्तारी किया करते थे। इफ्तारी को सहरी के तौर पर खाया करते थे। मगरिब और इशा के बीच गुस्ल फरमाया करते थे। हज़रत खदीजा रज़ि अल्लाह अन्हा ने आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के साथ कयाम ए रमज़ान किया। रमज़ान की रात को गुस्ल करके उम्दा लिबास पहनते थे और खुशबू लगाते थे अल्लाह ताला हम सबको नबी के व्यवहार पर चलने और आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के सभी आमाल पर अमल करने की तौफीक दे।

-आमीन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here