तापसी और अनुराग के घर छापे, शिवसेना ने पूछा- बाकी लोग ‘गंगाजल’ की तरह पवित्र हैं क्या?

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Webvarta Desk: बॉलिवुड ऐक्ट्रेस तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) और डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) पर हुई आईटी रेड के मुद्दे पर शिवसेना ने (Shivsena) मोदी सरकार (Modi Govt) पर निशाना साधा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ संपादकीय (Samana Editorial) में लिखा है कि केंद्र सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं है।

शिवसेना (Shivsena) ने सवाल पूछते हुए तंज कसा कि मोदी सरकार (Modi Govt) के खिलाफ बोलनेवाले कलाकार और सिने जगत के निर्माता-निर्देशकों पर ‘इन्कम टैक्स’ (Income Tax Raid) के छापे पड़ने लगे हैं। इनमें तापसी पन्नू (Taapsee Pannu), अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap), विकास बहल और वितरक मधु मंटेना का नाम प्रमुख हैं। तापसी पन्नू और अनुराग कश्यप खुलकर अपने विचार व्यक्त करते रहते हैं। क्या इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया है?

सब गंगाजल की तरह पवित्र हैं?

‘सामना’ (Samana Editorial) ने लिखा है कि हिंदी सिने जगत का व्यवहार और काम-धाम स्वच्छ और पारदर्शी है, अपवाद केवल तापसी और अनुराग कश्यप का है। सिने जगत की कई महान उत्सव मूर्तियों ने किसान आंदोलन के संदर्भ में विचित्र भूमिका अपनाई।

उन्होंने किसानों को समर्थन तो नहीं दिया, उल्टे दुनिया भर से जो लोग किसानों को समर्थन दे रहे थे उनके बारे में इन उत्सव मूर्तियों ने कहा कि ये हमारे देश में दखलंदाजी है। लेकिन तापसी और अनुराग कश्यप जैसे गिने-चुने लोग किसान आंदोलन के पक्ष में खड़े रहे। उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

10 साल पुराने मामले में रेड

10 साल पुराने मामले में पड़ी इस आईटी रेड पर भी सवाल उठाए हैं। सामना ने लिखा है कि 2011 में किए गए एक लेन-देन के संदर्भ में ये छापे पड़े हैं। इन लोगों ने एक ‘प्रोडक्शन हाउस’ बनाया और उसके टैक्स से संबंधित ये मामला है।

जिस हिसाब से इन्कम टैक्स ने छापे मारे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कहीं कुछ गड़बड़ तो है ही। लेकिन छापे मारने के लिए या कार्रवाई करने के लिए सिर्फ इन्हीं लोगों को क्यों चुना गया? तुम्हारे उस ‘बॉलीवुड’ में रोज जो करोड़ों रुपए उड़ रहे हैं, वो क्या गंगाजल के प्रवाह से आ गए?

मोदी सरकार का राजनितिक बदला

‘बॉलिवुड’ में लॉकडाउन काल में कई मुश्किलें हैं। फिल्मांकन और नए निर्माण बंद हैं। थिएटर बंद हैं। एक बड़ा उद्योग-व्यवसाय जब आर्थिक संकट में पड़ा हो, ऐसे में राजनीतिक बदला लेने के लिए ऐसे हमले करना ठीक नहीं है।

सिने जगत में मोदी सरकार की खुलकर चमचागीरी करनेवाले कई लोग हैं। उनमें कई लोग तो मोदी सरकार के सीधे लाभार्थी हैं। वो सारे व्यवहार और लेन-देन धुले हुए चावल की तरह साफ हैं क्या?

मुखर हैं तापसी

‘सामना’ ने लिखा है कि ‘पिंक’, ‘थप्पड़’ और ‘बदला’ जैसी फिल्मों में तापसी का जोरदार अभिनय जिन्होंने देखा होगा वे ऐसा नहीं पूछेंगे कि तापसी इतनी मुखर क्यों हैं? अनुराग कश्यप के बारे में भी यही कहना पड़ेगा। उनके विचारों से सहमति भले न हो लेकिन उन्हें उनका विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।

दीपिका पादुकोण ने जेएनयू में जाकर वहां के विद्यार्थियों से मुलाकात की तब उनके बारे में भी छुपे आंदोलन और बहिष्कार का हथियार चलाया गया। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ गंदी मुहिम चलाई गई। ये सब करनेवाले लोग कौन हैं या किस विचारधारा के हैं, ये छोड़ो। लेकिन यह तय है कि ऐसे काम करके वे लोग देश की प्रतिष्ठा बढ़ा नहीं रहे हैं।

बीजेपी का दोगलापन

‘सामना’ ने सवाल उठाया है कि पर्यावरणवादी कार्यकर्ता दिशा रवि को जिस घृणास्पद तरीके से गिरफ्तार किया गया और उसको लेकर जिस प्रकार दुनियाभर में मोदी सरकार पर टीका-टिप्पणी हुई, इससे देश की ही बेइज्जती होती है। गोमांस मामले में कई लोगों की बलि गई। लेकिन बीजेपी शासित राज्यों में गोमांस बिक्री जोरों पर है।

इस पर कोई क्यों नहीं बोलता? फिलहाल, देश में हर प्रकार की स्वतंत्रता का हवन हो रहा है। इसमें केंद्रीय जांच एजेंसी की निष्पक्षता पूर्ण कार्य की स्वतंत्रता भी जलकर खाक हो गई है। तापसी और अनुराग के मामले में यही हुआ है!

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