दुनिया के सबसे शक्तिशाली टैंक T-14 Armata को महाविनाशक बना रहा रूस, रिमोट से दागेगा गोले

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Webvarta Desk: रूस अपने टी-14 आर्मटा टैंक (Russian T-14 Armata Tank) और घातक बनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया का सबसे शक्तिशाली टैंक आर्मटा (Automatic Tank T-14 Armata) अब बिना क्रू मेंबर्स के अपने निशाने पर गोले दागने में सक्षम है। इससे रूस की भविष्य में होने वाले जंग की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल नोर्गोनो काराबाख क्षेत्र में आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच हुए युद्ध के बाद टैंकों की उपयोगिता पर ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कई विशेषज्ञों का दावा है कि आने वाले दिनों में युद्ध के दौरान टैंकों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। भारी वजन के कारण टैंकों के संचालन और रखरखाव में कई मुश्किलें आती हैं। हालांकि, अमेरिका और रूस सहित कई देश अब भी बड़ी संख्या में टैंकों को अपनी सेना में शामिल कर रहे हैं। भारत ने भी कुछ दिन पहले ही अर्जुन एमके-1ए मेन बैटल टैंक के 118 यूनिट के निर्माण का ऑर्डर दिया है।

रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट हो सकता है टी-14 आर्मटा टैंक

टी-14 आर्मटा टैंक (Russian T-14 Armata Tank) को हाल में ही रिमोट कंट्रोल के जरिए टेस्ट किया गया है। जिसमें दूर बैठे इसके चालक दल न रिमोट कंट्रोल से इस टैंक को बखूबी चलाया है। रिमोट कंट्रोल के कारण इस टैंक के क्रू सैकड़ों लीटर फ्यूल और टैंकों के गोले की रेंज से बाहर सुरक्षित रहेंगे।

दरअसल, अक्सर यह देखा जाता है कि शॉर्ट सर्किट या किसी लापरवाही के कारण टैंक के फ्यूल या विस्फोटकों में आग लग जाती है और इसका खामियाजा टैंकों के अंदर बैठे क्रू को भुगतना पड़ता है। लेकिन, दूर से इस टैंक को ऑपरेट करने के दौरान न तो दुश्मनों के एंटी टैंक मिसाइलों और न ही किसी दुर्घटना से इन चालकों को कोई खतरा होगा।

बिना क्रू के दुश्मनों के टैंक्स को बना सकता है निशाना

सैन्य निर्माण से जुड़े सूत्रों के हवाले से रूसी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक ने कहा कि जंग के मैदान में टी -14 आर्मटा टैंक बिना क्रू की मौजूदगी के अपने लक्ष्यों को खोजने और उन्हें बर्बाद करने में सक्षम है। इस परीक्षण के दौरान टी -14 (Russian T-14 Armata Tank) ने सफलतापूर्वक अपने लक्ष्यों को बर्बाद कर दिया।

रूस के सैन्य इतिहास में यह पहला मौका है जब दूर बैठे चालक दल ने रिमोट कंट्रोल के जरिए ऑपरेट करते हुए किसी टैंक का परीक्षण किया है। जिसके बाद यह कहा जा रहा है कि इस टैंक का गनर दुश्मनों के इलाके से दूर बैठकर उनपर निशाना साध सकता है। इससे युद्ध के दौरान होने वाली जनहानि से बचा जा सकता है।

एक साथ कई टॉरगेट को कर सकता है लॉक

रूस के टी-14 आर्मटा टैंक के फायर कंट्रोल सिस्टम (एफसीएस) में एक डिजिटल कैटलॉग है। जिसके जरिए दुश्मनों के टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और हेलीकॉप्टरों की स्पेशल सिग्नेचर का पता लगाया जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एलिमेंट्स मशीन के ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सुविधाओं के जरिए यह टैंक स्वतंत्र रूप से अपने लक्ष्य को खोजने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को पहचानने के बाद यह टैंक प्राथमिकता के आधार पर अपने टॉरगेट पर फायरिंग कर सकता है। रूसी मीडिया का दावा है कि ऐसी क्षमता वाला कोई भी दूसरा टैंक किसी भी देश के पास नहीं है।

T-14 Armata Tank 06

टी-14 आर्माटा टैंक रूसी सेना का मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) है। 80 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से चलने वाली इस टैंक का वजन करीब 55 टन है। इस टैंक को पहली बार 2015 में बनाया गया था। तब से लेकर अब तक रूसी सेना के परेड में कई बार इन टैंकों को प्रदर्शित किया जा चुका है।

रूस की आर्मटा को नेक्स्ट जेनरेशन का टैंक माना जाता है।यह टैंक 125 एमएम के स्मूथबोर कैनन से लैस होती है, जो 10 से 12 राउंड प्रति मिनट के दर से गोले दागने में सक्षम है। इस टैंक से एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल को भी फायर किया जा सकता है, जो दुश्मन के लो फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स जैसे हेलिकॉप्टर या छोटे ड्रोन का मार गिराने में सक्षम है। अभी तक इस टैंक के केवल 20 यूनिट को ही बनाया जा सका है। हालांकि, रूसी सेना इसके भी अपडेट वर्जन टी-15 आर्मटा का उपयोग कर रही है।

रूस ने तैनात किया घातक टर्मिनेटर टैंक

रूस ने बाल्टिक सागर में अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने अचूक निशाने वाले बीएमपीटी -72 टर्मिनेटर टैंक को तैनात कर दिया है। यह टैंक गोले बरसाने के साथ दुश्मनों के हेलिकॉप्टर और कम स्पीड से उड़ने वाले विमानों को भी मार गिराने में सक्षम है। इन टैंको को रूस के केंद्रीय सैन्य जिले में तैनात किया गया है।

इस टैंक को रूस की कंपनी Uralvagonzavod ने बनाया है। टर्मिनेटर के नाम से मशहूर यह टैंक शहरी क्षेत्र में लड़ाई के दौरान अपने दूसरे साथी टैंक्स और ऑर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल को नजदीकी सहायता प्रदान करता है। जिससे दुश्मनों के हेलिकॉप्टर, ड्रोन या कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दूसरे हवाई जहाज निशाना नहीं बना पाते हैं। BMPT-72 टैंक को पहली बार 2013 में रूसी आर्म्स एक्सपो में प्रदर्शित किया गया था।

सीरिया में टर्मिनेटर ने दिखाई थी अपनी ताकत

टर्मिनेटर टैंक एक कॉम्बेट प्रूवन वेपन है। यानी युद्ध क्षेत्र में भी इस टैंक की महारत को साबित किया गया है। रूस ने इसे 2017 में सीरिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में तैनात किया गया था। सीरिया के हेममीम हवाई अड्डे पर जब सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद रूसी चीफ ऑफ जनरल जनरल वलेरी गेरासिमोव से मिले थे, तब उन तस्वीरों में यह टैंक दिखाई दिया था।

टर्मिनेटर टैंक के प्रमुख हथियारों में 130 एमएम की एटाका-30 मिसाइल लॉन्चर दो 30 मिमी 2 ए 42 ऑटो-तोप शामिल हैं। जबकि, इस टैंक के दूसरे हथियारों में दो 30 मिमी एजी -17 डी ग्रेनेड लांचर और 7.62 मिमी पीकेटीएम मशीन गन हैं। इस टैंक को रूस की प्रसिद्ध टी-72 मेन बैटल टैंक के चेचिस पर बनाया गया है। टी-72 टैंक का उपयोग रूस-भारत समेत दुनियाभर के कई देशों में किया जाता है। भारत समेत कई देश ऐसे भी हैं जो इस टैंक को लाइसेंस के तहत अपने ही देश में बनाते भी हैं।

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