ममता और केजरीवाल जैसे नेता लोकतंत्र के लिए घातक : नेहा शालिनी दुआ

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Neha Shalini Dua

हाल ही में देश के पांच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं और इसमें सबसे ज्यादा सरगर्मी पश्चिम बंगाल में देखी जा रही है। जहां भाजपा अपने पूरे दल-बल के साथ पश्चिम बंगाल में जीत के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। वहीं दो बार से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने किले को बचाने के लिए अथक प्रयास करती दिख रही हैं। इसके अलावा दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने शराब लेने वालों की आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर दी जिस पर राजधानी की राजनीति में भूचाल आ गया। ऐसे अन्य तमाम मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की आक्रामक प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ से योगेश कुमार सोनी की खास बातचीत के मुख्य अंश…

हाल ही में केजरीवाल सरकार ने राजधानी में शराब लेने की कानूनी उम्र 25 से घटाकर 21 कर दी गई है। और यह भी कहा है कि इससे माफिया राज पर शिकंजा कसेगा और आईडी कार्ड दिखाकर शराब मिलेगी।

वो युवा पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेल रहे हैं। दरअसल केजरीवाल को अपनी हर बात के फायदे गिनवाने आते हैं। उन्होनें प्राइवेट ठेकों को खुलवाने के नाम पर करोडो डकारने की योजना बनाई है। आबकारी निती के तहत वो टैक्स कमाने की बात कर रहे हैं लेकिन जिनको ठेकों के लाइसेंस दिए उनको रिश्वत के रुप में कितना पैसा लिया जाएगा वो भी बता दें। और बात रही आईडी दिखाकर शराब लेने की तो यह नीति आज भी कितनी कारगर है स्पष्ट दिखता है। ऐसे कौन सी वाइन शॉप है जहां आईडी कार्ड देखकर शराब दी जाती है। अभी भी बिना किसी चैकिंग के कम उम्र के बच्चे शराब लेते नजर आ जाएगें। यह तो केजरीवाल का जनता को लूटने व बर्बाद करने नया का स्टंट है।

आम आदमी पार्टी ने आपकी पार्टी पर भी सौ करोड के घोटाले का आरोप लगाया है। जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और दवा का छिड़काव कराने का पैसा पूरा हजम कर गए।

दरअसल आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं व नेताओं की बातें सुनकर हंसी आती है व आश्चर्य भी होता है। अभी फोगिंग प्रक्रिया शुरु हुई है। दिल्ली में सवेंदनशील इलाको में शुरुवात हो चुकी है बाकी इलाकों में भी आने वाले दिनों में कर दी जाएगी। हमारी जितनी राशि की योजना नही होती उससे ज्यादा धनराशि के यह लोग पोस्टर लगा देते हैं। यदि दिल्ली की जनता से इतनी ही हमदर्दी है तो पोस्टरबाजी से गुमराह न करके वो उनका पैसा जनता की भलाई के लिए लगा दें। केजरीवाल एंड टीम जनता को मूर्ख बनाकर अपना घर भर रही है।

आप पश्चिम बंगाल जीतने की हुंकार किस आधार भर रहे हैं?

आज वहां की स्थिति से हर कोई अवगत है। किस तरह हिंदू समाज पर प्रहार किया जा रहा है। पूरे देश ही नही दुनिया में पश्चिम बंगाल में हिंसा से मौतों के आकडें बेहद चौकाने वाले हैं। हर रोज हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं,नेताओं व परिजनों को मारा जा रहा है। चुनावों में तो हिंसा का प्रतिशत कितना बढ़ जाता है यह सबके सामने हैं। दरअसल ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को अपना खानदानी किला समझने लगी लेकिन वो शायद यह भूल जाती है कि वो भी किसी को हराकर ही जीती थी। चुनाव को चुनाव के तरीके से ही लेना चाहिए लेकिन वो हर बात अपने वर्चस्व पर ले जाती हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग के सामने 63 शिकायतें दर्ज की है।इन शिकायतों में कई तरह के आरोप भारतीय जनता पार्टी के सामने रखें हैं। इस पर क्या कहना चाहेंगी?

जब किसी पार्टी के पास मुद्दे खत्म हो जाते हैं तो वह ऐसे समय पर तथ्यों से हटकर इस तरह की हरकत करता है। आप खुद ही सोचिए किसी यदि उनको कुछ गलत महसूस हुआ भी है तो वह बात एक या दो शिकायत से भी की जा सकती है,63 शिकायतों का क्या अर्थ हुआ? क्या पूरे राज्य व सिस्टम में ही गढ़बड है? ममता बनर्जी अपनी हार के डर से बौखला चुकी है।

पिछले विधान सभा में 294 में से मात्र आप 3 सीटें आई थी इसके अलावा इस राज्य में आपकी पृष्ठभूमि कभी मजबूत नही रही। तो कैसे जीतने की उम्मीद कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की जनता ने बदहाली से त्रस्त होकर हमें पुकारा है। यदि आपको ज्ञात हो कि बीते लोकसभा चुनाव में 40 में 18 सीटें हमने जीती थी। उस ही दिन से ममता परेशान हो गई थी कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जनता ने इतना बडा परिवर्तन ला खडा कर दिया था। किसी कोई पट्टा नही लिखा होता। जनता को जो समझ में आएगा वो ही सत्ता में आएगा।

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