On This Day: 87 चौके, 26 छक्के, 435 टारगेट.. क्रिकेट के सबसे यादगार मैचोंं में शुमार है SA vs AUS ODI

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Webvarta Desk: On This Day, 12 March 2006: तब टी20 क्रिकेट का नशा नहीं चढ़ा था। भारत ने पहला वर्ल्ट टी20 नहीं जीता था। आईपीएल, बिग बैश लीग या पाकिस्तान सुपर लीग जैसी टी20 सीरीज का भी आगाज नहीं हुआ था। लेकिन तब आज ही के दिन यानी 12 मार्च को साल 2006 में एक ऐसा वनडे इंटरनैशनल मुकाबला खेला गया था जिसने टी20 का मजा दिया और ऐसा मजा जिसे आज तक याद किया जाता है।

वनडे इंटरनैशनल के इतिहास में पहली बार किसी टीम ने 400 से ज्यादा रन बनाए और एक ही मैच में दो बार। जोहान्सबर्ग के उस मैच (12 March On this Day in Johannesburg) को याद करके आप कह सकते हैं बेशक यह वनडे इंटरनैशनल के सबसे रोमांचक मुकाबलों की लिस्ट में चोटी में शुमार रहेगा।

साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया (SA vs AUS) के बीच वनडे सीरीज 2-2 से बराबर थी। यह सीरीज का आखिरी मैच था। वॉनड्रस की पिच पर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इस मैदान पर ऑस्ट्रेलिया और पॉन्टिंग की अच्छी यादें जुड़ी थीं। तीन साल पहले यहीं पर भारत को हराकर उसने 2003 का वर्ल्ड कप जीता था। पिच बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी और ऑस्ट्रेलिया ने इसका भरपूर फायदा भी उठाया। इस मैच में कुल 87 चौके और 26 छक्के लगे।

ए़डम गिलक्रिस्ट के साथ साइमन कैटिच ने पारी की शुरुआत की। गिली अपने ही अंदाज में बैटिंग कर रहे थे। तेज और ताबड़तोड़। उन्होंने 35 बॉल पर हाफ सेंचुरी पूरी की। 8 चौकों के साथ। हालांकि इसके बाद वह थोड़ा धीमा पड़े और 44 गेंद पर 55 रन बनाकर रोजर टेलीमार्कस का शिकार बने। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 15.2 ओवर में 97 रन था। दूसरे छोर पर साइमन कैटिच 49 गेंद पर 39 रन बनाकर नाबाद रहे।

इसके बाद क्रीज पर उतरे रिकी पॉन्टिंग। उन्होंने पहली पांच गेंदें, जिनमें एक नो-बॉल भी शामिल थी। कोई रन नहीं बनाया। शुरुआती 17 गेंद पर उन्होंने सिर्फ 10 रन बनाए थे। सिर्फ एक चौके के साथ। पर यह सिर्फ तूफान से पहले की शांति थी।

इसके बाद पॉन्टिंग शुरू हो गए। ठीक वैसे ही जैसे वर्ल्ड कप 2003 में हुए थे। ताबड़तोड़ चौके और छक्के लगाने शुरू कर दिए। दूसरे छोर पर कैटिच उनका साथ देते रहे। दोनों के बीच 119 रन की पार्टनरशिप हुई। करीब 15 ओवर में 119 रन की पार्टनरशिप हुई। कैटिच 90 गेंद पर 79 रन की पारी खेल कर आउट हुए। नौ चौके और एक छक्के की मदद से। लेकिन पॉन्टिंग नहीं रुक रहे थे।

साउथ अफ्रीका के कप्तान ग्रीम स्मिथ को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या किया जाए। सभी गेंदबाज सिर्फ पिटाई खाने के लिए ही बोलिंग कर रहे थे। इसके बाद माइकल हसी ने अपनी छवि से उलट तेज पारी खेली। महज 51 गेंद पर 81 रन बनाए। 9 चौके और तीन छक्के लगाए और ऐंड्रू हॉल का शिकार बने। जब वह आउट हुए स्कोर 46.1 ओवर में 374 तक पहुंच चुका था।

अगले ओवर में जब रिकी पॉन्टिंग 105 गेंद पर 164 रन जिसमें 13 चौके और नौ छक्के लगाकर आउट हुए तो स्कोर 400 के पार पहुंच चुका था। पहली बार वनडे इंटरनैशनल में किसी टीम ने इतने रन बनाए थे। ऐंड्रू सायमंड्स ने 13 गेंद पर 27 नाबाद रन बनाकर स्कोर को चार विकेट पर 434 रन तक पहुंचा दिया। वनडे इंटरनैशनल का उस समय का सर्वाधिक स्कोर।

साउथ अफ्रीका के हर गेंदबाज की धुनाई हुई थी। जैक कालिस ने 6 ओवर में 70 रन दिए थे तो मखाया नतिनी ने 9 ओवर में 80। 434 रन बनाने के बाद तो लगा था कि अब सिर्फ एक नतीजा निकल सकता है और वह ऑस्ट्रेलिया की जीत। बोटा डिपानर को दूसरे ही ओवर में आउट करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के हौसले बुलंद हो गए। यह कंगारू टीम चढ़कर खेलती थी और यहां तो उसके बाद रेकॉर्ड स्कोर के बाद जल्दी विकेट भी मिल गया था। पर पिक्चर अभी बाकी थी मेरे दोस्त। और क्रिकेट का रोमांच किसी पिक्चर के रोमांच से कम नहीं था।

कप्तान स्मिथ का साथ देने के लिए उतरे हर्शल गिब्स। इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलियाई उम्मीदों को झटका देना शुरू किया। दोनों ने धमाकेदार बल्लेबाजी करनी शुरू की। ऑस्ट्रेलिया अब परेशान था। उससे न स्मिथ काबू आ रहे थे और न हर्शल गिब्स ने 13 चौकों और दो छक्कों की मदद से सिर्फ 55 गेंद पर 90 रन बना डाले। बोर्ड पर 190 रन थे। साउथ अफ्रीका ने जल्द ही अपने 200 रन पूरे किए। डि विलियर्स हालांकि सिर्फ 14 रन बनाकर आउट हो गए। गिब्स वनडे में पहला दोहरा शतक बनाने के करीब पहुंच रहे थे।

ऐसा लग रहा था कि आज वह पूरा बदला लेंगे। पर सायमंड्स ने ब्रेट ली के हाथों उन्हें कैच करवा दिया। 175 के स्कोर पर। महज 111 गेंदों पर कमाल की पारी। उन्होंने 21 चौके और सात छक्के लगाए। स्कोर था 31.5 ओवर में 299। ऑस्ट्रेलिया को यहां जीत के आसार नजर आने लगे। इसके बाद जैक कैलिस भी सिर्फ 20 रन बनाकर आउट हो गए।

साउथ अफ्रीका ने इसके बाद टीम अफर्ट शुरू किया। छोटे लेकिन अहम योगदान होते रहे। एक छोर पर अनुभवी विकेटकीपर मार्क बाउचर टिके रहे और रन बटोरते रहे। और दूसरे छोर पर बल्लेबाज उपयोगी पारियां खेलते रहे। जोहान वेन डर वर्थ ने सिर्फ 18 गेंद पर तीन छक्कों और एक चौके की मदद से 35 रन बनाकर साउथ अफ्रीकी उम्मीदों को परवान चढ़ाया। 49.3 ओवर में जब ऐंड्रू हाल 4 गेंद पर सात रन (एक छ्क्का) बनाकर पविलियन लौटे तो हर किसी की धड़कनें थमीं हुईं थीं। ऑस्ट्रेलिया जीत से एक विकेट दूर था तो साउथ अफ्रीका दो रन।

क्रीज पर उतरे मखाया नतिनी। इतना करीब आकर साउथ अफ्री का हारना नहीं चाहता था और इतना बड़ा स्कोर बनाकर ऑस्ट्रेलिया भी मुकाबला गंवाना भी नहीं चाहता था। ब्रेट ली की तेज गेंद पर नतिनी ने किसी तरह एक रन बटोर लिया। अब स्कोर बराबर था। दो गेंद, एक रन या एक विकेट। मुकाबला किसी भी ओर जा सकता था। ली की गेंद पर जैसे ही बाउचर ने चौका लगाया, इतिहास बन गया। साउथ अफ्रीकी खेमा आसमान पर था। इस चौके के साथ बाउचर ने अपनी हाफ सेंचुरी पूरी की। लेकिन असल में यह पहाड़ की चोटी पर झंडा लहराने जैसा था। रनों के पहाड़ पर। पॉन्टिंग दुखी थे, बेहद दुखी। जाहिर सी बात है इतना बड़ा स्कोर बनाने के बाद कौन हारना चाहेगा।

इस मैच में कुल 87 चौके और 26 छक्के लगे, जो एक रेकॉर्ड है। ऑस्ट्रेलिया के मिक लुईस के नाम ऐसा रेकॉर्ड दर्ज हो गया जो कोई भी नहीं चाहेगा। 10 ओवर में बिना कोई विकेट लिए 113 रन। यह वनडे का सबसे महंगा बोलिंग फिगर है। आज 15 साल बाद भी यह मुकाबला देखने वालों के जेहन में ताजा है।

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