Sunday, September 25, 2022

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने BCCI से कहा- 70 साल से ऊपर के लोग ही क्यों, युवाओं को मौका दें

वेबवार्ता: SC on BCCI: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का बड़ा बयान सामने आया है।

कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि बीसीसीआई (BCCI) एक स्वायत्त निकाय है और वह उसके कामकाज का सूक्ष्म प्रबंधन नहीं कर सकता है। साथ ही कोर्ट ने देश के शीर्ष क्रिकेट निकाय से पूछा कि वह आईसीसी में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए 70 साल से अधिक उम्र के लोगों को क्यों रखना चाहता है?

शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने यह टिप्पणी बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उनके अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह सहित अपने पदाधिकारियों के कार्यकाल के संबंध में अपने संविधान में संशोधन करने की मांग की गई थी। साथ ही कूलिंग ऑफ पीरियड के नियम को खत्म करने की भी मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पदाधिकारियों के कार्यकाल के बीच कूलिंग ऑफ पीरियड को समाप्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इसका उद्देश्य यह है कि कोई निहित स्वार्थ नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह बुधवार को सुनवाई जारी रखेगी और फिर आदेश पारित करेगी। बीसीसीआई द्वारा अपनाए गए संविधान के अनुसार, एक पदाधिकारी को राज्य संघ या बीसीसीआई या दोनों संयुक्त रूप से लगातार दो कार्यकालों के बीच तीन साल की कूलिंग-ऑफ पीरियड से गुजरना पड़ता है।

बीसीसीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ से कहा कि देश में क्रिकेट का खेल काफी सुव्यवस्थित है। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई एक स्वायत्त संस्था है और सभी बदलावों पर क्रिकेट संस्था की एजीएम ने विचार किया है। इस पर पीठ ने कहा- बीसीसीआई एक स्वायत्त निकाय है। हम इसके कामकाज का सूक्ष्म प्रबंधन नहीं कर सकते।

इसके बाद तुषार मेहता ने कहा- जैसा कि अभी का संविधान है, उसमें कूलिंग ऑफ पीरियड है। अगर मैं एक कार्यकाल के लिए राज्य क्रिकेट संघ और लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए बीसीसीआई का पदाधिकारी हूं, तो मुझे कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना होगा। उन्होंने कहा कि दोनों निकाय अलग हैं और उनके नियम भी अलग हैं और जमीनी स्तर पर नेतृत्व विकसित करने के लिए पदाधिकारी के लगातार दो कार्यकाल बहुत कम हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा- नेतृत्व जमीनी स्तर पर विकसित होता है और यह राज्य संघ में रहता है। जब तक उनका बीसीसीआई में पदोन्नत होने का समय आता है, उन्हें अनिवार्य रूप से तीन साल की कूलिंग-ऑफ पीरियड के लिए जाना पड़ता है। यदि कोई राज्य संघ का सक्रिय सदस्य नहीं है तो वह बीसीसीआई का सदस्य नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि कूलिंग ऑफ पीरियड के लिए बीसीसीआई पदाधिकारी द्वारा राज्य संघ में पद धारण करने पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

जब यह दलीलें दी जा रही थीं, तो न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने आगाह किया कि हम चर्चा में संलग्न हैं और कोई निर्णय पारित नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया सोचता है कि हम अदालत में जो कुछ भी कहते हैं वह फैसला है, लेकिन यह प्रतिक्रिया और तथ्यों की बेहतर समझ हासिल करने के लिए सिर्फ एक संवाद है। पीठ ने कहा कि इसलिए राज्य संघ का कोई पदाधिकारी मौजूदा संविधान के अनुसार तीन साल की कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरे बिना बीसीसीआई में किसी पद पर नहीं रह सकता है।

इसके बाद तुषार मेहता ने कहा कि दूसरा संशोधन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में प्रतिनिधित्व के लिए गवर्निंग काउंसिल में 70 साल की उम्र के प्रतिबंध से संबंधित है, जिसे बीसीसीआई हटाना चाहता है। इस पर पीठ ने कहा- हमारे यहां से सिर्फ 70 साल से ऊपर के प्रतिनिधि क्यों हों, युवा लोगों को आईसीसी में देश का प्रतिनिधित्व करने दें? हम यह नहीं कह रहे हैं कि 70 साल से अधिक उम्र के लोगों ने अनुकरणीय काम नहीं किया है, लेकिन यह एक खेल है। हमारे पास हमारे अटॉर्नी जनरल हैं, जिनकी उम्र 70 से ऊपर है, 70 से ऊपर के कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो अपने क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं।

इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा- आईसीसी एक परिषद है जहां यह तय होता है कि किस देश को कितना फंड मिलता है। दुनिया भर के क्रिकेट निकायों के दिग्गजों के बीच भारी बातचीत होती है। युवाओं को 30 से 40 साल के अनुभव वाले दिग्गजों से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में आईसीसी प्रतिनिधित्व के लिए उम्र पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस पर पीठ ने कहा- क्या आपके कहने का मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड या इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड में आईसीसी प्रतिनिधित्व के लिए कोई आयु प्रतिबंध नहीं है? हमें रिकॉर्ड पर सामग्री दिखाएं। हमारे पास उसके संबंध में कोई सामग्री नहीं है। आप तथ्य पेश करें।

पीठ ने कहा कि वह बुधवार को भी अपनी सुनवाई जारी रखेगी और न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह को सभी विवरणों को समेटने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि वह आदेश पारित करेगी। सिंह ने सुझाव दिया कि यदि किसी व्यक्ति ने राज्य संघ के पदाधिकारी के रूप में तीन साल की एक अवधि की सेवा की है और फिर वह बीसीसीआई में एक पदाधिकारी के रूप में सेवा करता है तो उसे कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरे बिना छह साल की लगातार दो बार सेवा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

बीसीसीआई ने अपने प्रस्तावित संशोधन में अपने पदाधिकारियों के लिए कूलिंग-ऑफ पीरियड को समाप्त करने की मांग की है, जिससे सौरव गांगुली और जय शाह संबंधित राज्य क्रिकेट संघों में छह साल पूरे करने के बावजूद अध्यक्ष और सचिव के रूप में पद पर बने रहेंगे। इससे पहले, न्यायमूर्ति आरएम लोढा की अगुवाई वाली समिति ने बीसीसीआई में सुधारों की सिफारिश की थी जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

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