सत्ता की हनक! आशा, उषा और सहयोगिनी कार्यकर्ताओं से नहीं मिले मंत्री ओपीएस भदौरिया

0
157

वेबवार्ता संवाददाता, ग्वालियर। प्रदेश में चल रही उधार की भाजपा नीति सरकार के मंत्री सत्ता के दंभ, घमंड और हनक में इस कदर चूर हैं कि उनको छोटे छोटे कर्मचारी जो कोरोना महामारी से फील्ड में लड़ रहे हैं उनसे मिलकर उनकी समस्याओं को सुनलें!

दरअसल मामला पर्यावरण दिवस के अवसर पर भिण्ड जिला अस्पताल में बृक्षारोपण करने आये नगरीय प्रशासन एवं आवास राज्य मंत्री तथा जिले के कोविड प्रभारी ओपीएस भदौरिया से जुड़ा है।

जिला अस्पताल में बृक्षारोपण करने आये मंत्री से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अस्पताल कैम्पस में अनिश्चित कालीन धरने पर बैठीं आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी बात कहनी चाही लेकिन सत्ता के मद में चूर मंत्री भदौरिया ने अपना वाहन नही रोका मंत्री जब नहीं रुके तो धरना रत सभी महिलाओं को मंत्री के वाहन के सामने आना पड़ा। उसके बाद भी महज कुछ सेकेंड बात सुनकर मंत्री रवाना होगये कोई आश्वासन नहीं दिया।

मंत्री के इस रवैया के चलते संगठन की सभी सदस्यों में नाराजगी देखी गई। आपको बतादें की पिछली 1 जून से आशा,ऊषा और सहयोगिनी कार्यकता अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। उनकी मांगें हैं कि वर्ष 2005 से एन.एच.एम. के अंतर्गत कार्य कर रही कुशल एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ता जिन्होंने कोविड 19 महामारी के इस दौर में भी अपनी व अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर बगैर किसी सुरक्षा संसाधन एवं सम्मानजनक पारिश्रमिक के स्वास्थ्य सेवा का जो उत्कृष्ट कार्य कर रहीं हैं लेकिन सरकार के द्वारा उनके कार्यों की लगातार अनदेखी की जारही है। उनकी मांगों का आज तक कोई निराकरण नहीं किया गया है।

adbd4dff 83a0 4794 b45b 85834e7450d3

आशा ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने सरकार को अपनी 6 मुख्य मांगे रखीं हैं जिनमें आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं को सरकारी कार्मचारी का दर्जा दिया जाये। तब तक आशा , ऊषा कार्यकर्ताओं को 18000 एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं को 24000 मानदेय निश्चित किया जाए।

महामारी आपदा जैसे कोविड 19 में काम कर रहे अग्रिम पंक्ति का योद्धा घोषित किया जाये, आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं से महामारी आपदा से संबंधित कार्य कराने के समय तक उनके एवं परिवार के इलाज का खर्च सरकारी और निजी संस्थानों में शासन के द्वारा वहन किया जावे। इसके अलावा कुछ अन्य मांगें निम्न हैं…

  • प्रोत्साहन राशि प्रतिमाह 10000
  • सुरक्षा सामग्री
  • सम्मान पत्र एवं उनके परिवार जन को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किये जाये
  • क्षेत्र में कार्यकर्ताओं पर हो रहे अभद्रता एवं हमलों के प्रकरणों में त्वरित कठोर कार्यवाही की जावे
  • निर्धारित योग्यता रखने वाली आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं को 6 माह का प्रशिक्षण देकर ए.एन.एम.के रिक्तपदों पर नियुक्ति किया जावे।
  • 15 से 20 गांवों में भ्रमण कर आशा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी एवं सहयोग प्रदान करने वाली सहयोगिनी को निश्चित यात्रा भत्ता दिया जाये एवं सहयोगिनी के स्थान पर कार्य आधारित शब्द पर्यवेक्षक से संबोधित किया जावे।
  • दुर्घटना, मृत्यु, अपंग, एवं अन्य परिस्थितियों में शासकीय कर्मचारियों की भांति परिवार को भरण पोषण हेतु पेंशन आर्थिक सहायता 500000 एक मुश्त एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जावे
  • सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जावे
  • आशा, ऊषा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ताओं को आकस्मिक समस्यायें दुर्घटना, बीमारी, प्रशव एवं अन्य के दौरान अन्य शासकीय कर्मचारियों की भांति आवेदन एवं मेडीकल प्रस्तुत करने पर पूरा मानदेय दिया जावे एवं सभी शासकीय अवकाशों का लाभ दिया जाये
  • संगठन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पूर्व में कई वर्षों से शासन द्वारा हमारे कार्य एवं मांगों की अनदेखी की जा रही है इसलिये हमारा संगठन 01/06/2021 से अनिश्चित कालीन काम बंद हडताल करने के लिए विवश है।

संगठन से जुड़ीं वर्षा शर्मा, ऊषा नरवरिया एवं प्रियंका शिवहरे आदि सैकडों कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शासन हमारी मांगों का निराकरण नहीं करता है तो हमारा संगठन आगामी समय मे व्यापक आंदोलन के द्वारा अपना विरोध व असंतोष व्यक्त करने के लिए विवश होगा।

तहसील से लेकर जिले तक अधिकारियों को ज्ञापन और आवेदन देकर थक चुकीं आशा,ऊषा एवं सहयोगिनी संगठन की कार्यकर्ताओं को कहीं कोई आस नहीं दिखी तो उन्होंने जिला अस्पताल में मंत्री के सामने अपनी बात रखनी चाही पर उधार की सरकार में सत्ता के नशे में मद मस्त मंत्री ने उनकी एक न सुनी?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here