केन बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पन्ना वासियों का विरोध प्रदर्शन

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Ken Betwa Link Project

-”केन का पानी पन्ना लायो” का मुद्दा एक बार फिर पकड़ रहा जोर

-कीमती हीरे उगलने वाली धरती के वासी जूझ रहे पेयजल की समस्या से

-एम.एस खान-

पन्ना, 01 अप्रैल (वेबवार्ता)। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत ग्राम डौढ़न में बन रहे बांध का विरोध लम्बे समय से जिलेवासी और पर्यावरणविदों द्वारा किया जाता रहा है। जिलेवासियों की अपनी दलील है कि बांध बनने से केन का पानी दूसरे प्रदेश को चला जायेगा और यहां के लोगों को इसका व्यापक लाभ नहीं मिलेगा इसके अलावा पन्ना टाइगर रिज़र्व का बड़ा भूभाग डूब जाएगा।

डूब क्षेत्र के लाखों पेड़ों को काटा जायेगा जिससे पर्यावरणीय परिवर्तन से इंकार नहीं किया जा सकता। केन बेतवा लिंक परियोजना के अस्तित्व में आने के पहले पन्ना जिला वासियों की मांग रही है कि केन का पानी लाया जाये। साल दर साल जिलेवासी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन जनप्रतिनिधियों की अकर्मणता के कारण बेशकीमती हीरा उगलने वाली धरती के वासी पीने योग्य पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। राजनेताओं और यहां के जनप्रतिनिधियों ने पन्ना जिलावासियों की इस मांग को क्यों नज़रअंदाज किया है यह विचारणीय प्रश्न है।

आज केन का पानी बेतवा नदी उड़ेला जा रहा है इससे पन्ना निवासियों को क्या लाभ होगा? और सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कारण पन्ना टाईगर रिज़र्व का बड़ा भू-भाग पानी में डूब जाने के कारण बाघों के बढ़ रहे कुनबे का क्या होगा, क्या अब सरकार पन्ना टाईगर रिज़र्व में रह रहे बाघों को अन्यत्र बसाने की योजना बनाएगी। पन्ना टाईगर रिज़र्व में रह रहे जानवरों का प्राकृतिक आवास छिन जाने के क्या दुष्परिणाम होंगे तथा जैव विविधता पर इसका कितना घातक असर होगा इस सवाल का जवाब फिलहाल भविष्य के गर्त में है।

Ken Betwa Link Project

पन्नावासी सालॉन से पानी की गहराती विकराल समस्या से जूझ रहे हैं और लम्बे समय से मांग कर रहे हैं कि अगर केन नदी का पानी पन्ना लाया जाए तो पन्ना वासियों को पानी की समस्या से निजात मिल सकती है। किन्तु पन्नवासियों की समस्या को दरकिनार करते हुये सरकार केन का पानी बेतवा नदी में उड़ेल रही है इससे केन नदी के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक दशक से भी अधिक समय तक यह परियोजना इसलिये अधर में लटकी रही क्योंकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकार के बीच पानी के बटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी किंतु केंद्र सरकार की मध्यस्ता से इसको सुलझा लिया गया है और उत्तर प्रदेश सरकार जितने पानी की मांग कर रही थी उसको मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने मान लिया है।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं इसलिये पानी के बटवारे के मुद्दे को आसानी से सुलझ गया तथा 22 मार्च को दोनों प्रदेशों के बीच एमओयू पर दस्तखत गये। इस प्रक्रिया पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल खड़े करते हुये कहा था कि मोदी सरकार के दबाव में शिवराज सरकार ने अनुबंध की शर्तों के विपरीत कई मुद्दों पर झुककर मध्य प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया है, उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से तय शर्तों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग हुये कहा है कि प्रदेश की जनता को वास्तविकता बताई जानी चाहिए।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिला की सीमा पर केन नदी पर ग्राम डोढ़न में 73.2 मीटर ऊंचा बांध बनाकर 212 किलोमीटर लम्बी नहर के माध्यम से केन का पानी बेतवा नदी में उड़ेला दिया जायेगा।

maharani jeeteshwari devi pannaपन्ना राज परिवार की महारानी जीतेश्वरी देवी ने केन बेतवा लिंक परियोजना को पन्ना वासियों के लिये अभिशाप बताते हुए कहा है कि सरकार बार-बार पन्ना वासियों के साथ छल कर रही है। इस परियोजना के कारण केन नदी का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और इस जीवनदायिनी नदी के ख़त्म हो जाने के कारण यहां की जीव विविधता पर गहरा असर पड़ेगा। केन बेतवा लिंक परियोजना के पहले से पन्ना के लोग शुद्ध पीने योग्य पानी के लिये सालों से मांग कर रहे हैं कि केन नदी का पानी पन्ना लाया जाये लेकिन सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों ने आमजन की आवाज़ और समस्या को नहीं सुना। केन का पानी पन्ना वासियों को नहीं मिल रहा है इसके विपरीत हमारा पानी दूसरे राज्य के उपयोग के लिये जा रहा है यह पन्नावासियों के साथ छल है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए हैं जैसे ही केन बेतवा लिंक परियोजना पर दोनों प्रदेश के बीच सहमति बनी उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीएम केन और बेतवा नदी को जोड़ने को लेकर पैक्ट पर साइन करेंगे। इससे मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व बर्बाद हो जाएगा। मैंने दस साल पहले विकल्प बताए थे लेकिन अफ़सोस।

advocate rajesh dixitपन्ना के आम नागरिक और पर्यावरण प्रेमी लगातार केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे हैं तथा पन्ना टाईगर रिज़र्व के अस्तित्व को लेकर चिंतित हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और पर्यावरणविद राजेश दीक्षित का कहना है कि पन्ना टाइगर रिज़र्व का जब इतना बड़ा क्षेत्र डूब रहा है तो पन्ना में केन का पानी लाने में क्यों अड़चने लगाईं जा रही है। पन्ना के लोगों को देश की सबसे कम प्रदूषित केन नदी का पानी पेयजल के रूप में उपलब्ध करना सरकार की जिम्मेदारी है। वर्तमान में पन्ना के लोग तालाबों में भरे पानी का उपयोग पेयजल के रूप में कर रहे हैं जो पीने योग्य नहीं है। पार्क प्रबंधन का अब यह तर्क भी नहीं चल सकता है कि इससे पार्क का नुकसान है। बांध के कारण पार्क का बहुत बड़ा क्षेत्र डूब रहा है ऐसी स्थिति में अगर केन नदी का पानी पन्ना लाने के लिये पार्क की जमीन का कुछ भाग उपयोग में आता है तो यह नुकसान न के बराबर है। सरकार को पन्ना के लोगों को पेयजल के रूप में केन का पानी उपलब्ध कराया जाना अति आवश्यक है।

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