कोरोना : मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की लापरवाही से मर रहे लोग

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Muzaffarnagar-Medical-Hospital
  • कम स्टाफ होने की वजह से तंत्र हो रहा है फेल

  • 200 मरीजों पर केवल एक-दो डॉक्टर

  • मरीज बार-बार अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं

मुजफ्फरनगर, 30 अप्रैल (योगेश सोनी)। देश में कोरोना को लेकर स्थिति भयावह है। हर रोज मौत के आंकडे यह बता रहे हैं कि हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। लेकिन कुछ जगह इलाज बेहतर मिलने से लोग बच भी रहे हैं लेकिन कहीं-कहीं तो बहुत बुरा हाल है। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हालात बहुत खराब हैं। पीड़ित अंकुर वर्मा ने बताया कि मेरे पिताजी को वहां मैने जब एडमिट करवाया तो डॉक्टर ने कहा कि इनको कोरोना है और उन्होंने कोरोना का उपचार करना शुरु कर दिया। लेकिन जब दो दिन बाद रिपोर्ट नेगेटिव आई।

इलाज उसके बाद भी चलता रहा। इलाज के दौरान सत्येंद्र वर्मा ने कई बार अपने परिजनों से फोन पर बात करके बताया मुझे सांस नही आ रहा और कोई डॉक्टर नही आ रहा। इसके बाद परिजन डॉक्टरों को उनके पास भेजने के लिए अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाते और डॉक्टर उसके दो-तीन घंटे बाद उनके पास पहुंचते। तीन दिन में ऐसा करीब दस बार हुआ। लेकिन अंत में तंत्र के आगे सत्येंद्र वर्मा हार गए और लापरवाही की भेंट चढ़ गए। मरने से पहले सत्येंद्र वर्मा ने वहां कि बदहाली का एक विडियो भी बनाया। जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि मरीजों की हालात कितनी खराब है और वहां कोई भी डॉक्टर नही है।

इसके बाद इस दर्दभरी कहानी का दूसरा अध्याय शुरु हो जाता है। जब मृतक की बॉडी परिजनों को सौंपी जाती है तो वहां किसी और के नाम का एक्स-रे निकला। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से इसकी शिकायत की तो उन्होंने बेइज्जत करके भगा दिया।सू त्रों के अनुसार इस अस्पताल में कोरोना के लिए 200 बेड आरक्षित कर रखे हैं और इतनी अधिक संख्या पर एक शिफ्ट में मात्र एक या दो डॉक्टर ही मौजूद रहते हैं। पीडित से बाहर से रेमडीसीवीर इंजेक्शन भी मंगवाए वहीं मौत होने के बाद अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हम अपनी ओर से रेमडीसीवर इंजेक्शन देते हैं जिसका हमारी पास पर्याप्त स्टॉक है। इस हिसाब से वहां इंजेक्शन की भी कालाबाजारी चल रही है।

Ankur Vermaपापा मुझे थोडी-थोडी देर में फोन करके कह रहे थे कि बेटा मुझे यहां से निकाल ले। यहां कोई इलाज नही हो रहा। यह लोग बार-बार ऑक्सीजन भी हटा रहे हैं। डॉक्टर नही आ रहा केवल नर्सिंग स्टॉफ की काम कर रहा है। मुझे यहां कई लोगों ने कही थी कि जितनी जल्दी हो सके आप यहां से अपने मरीज को निकाल लो लेकिन कहीं भी बेड की व्यवस्था नही हुई। और मैंने अपने पापा को खो दिया। इसके अलावा मैंने बाहर से रेमडीसीविर इंजेक्शन भी खरीद के दिए जो मुझे पैंतीस हजार रुपये का एक मिला। मैं दो दे चुका था।

-अंकुर वर्मा, मृतक का बेटा

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