Shabnam Case: वो 3 दलीलें… जो शबनम को फांसी की सजा से बचा सकती हैं

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Webvarta Desk: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh News) के रामपुर की जिला जेल में बंद अमरोहा के बावनखेड़ी नरसंहार की दोषी शबनम (Shabnam Case) की फांसी पर मंगलवार को रोक लग गई। दरअसल, जिला सरकारी वकील (डीजीसी) ने अपनी रिपोर्ट जिला जज के निर्देश पर अदालत में सौंपी थी। उसमें बताया गया था शबनम की एक दया याचिका राज्यपाल के पास लंबित है। वहीं शबनम के वकील ने कोर्ट में फांसी की सजा टालने के लिए तीन मजबूत दलीलें पेश की हैं।

अमरोहा के डीजीसी महावीर सिंह के मुताबिक, जिला जज की तरफ से शबनम केस (Shabnam Case) की रिपोर्ट 23 फरवरी तक मांगी गई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इसमे बताया गया था कि रामपुर जेल के जरिए राज्यपाल के यहां शबनम की एक दया याचिका लंबित है। इससे डेथ वारंट को फिलहाल रोक दिया गया है।

डेथ वारंट क्यों जारी नहीं हुआ

डीजीसी ने बताया कि नियम है कि अगर कोई प्रार्थना पत्र या याचिका लंबित होती है, तो डेथ वारंट जारी नहीं किया जाता। दया याचिका दो बार दायर करने का अधिकार होता हैं। एक बार राष्ट्रपति शबनम (Shabnam Case) की दया याचिका खारिज कर चुके हैं। दूसरी राज्यपाल के यहां लंबित है।

किस मामले में हुई है शबनम को फांसी की सजा?

अमरोहा जिले के गांव बावनखेड़ी की शिक्षामित्र शबनम (Shabnam Case) ने अप्रैल 2008 की रात प्रेमी सलीम संग अपने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, भतीजे अर्श और फुफेरी बहन राबिया की हत्या कर दी थी। शबनम, सलीम से शादी करना चाहती थी। वह सलीम के बच्चे की मां बनने वाली थी।

हत्याकांड में शबनम और सलीम को फांसी की सजा हुई है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। राष्ट्रपति भी शबनम की दया याचिका को नामंजूर कर चुके हैं। पिछले दिनों जिला जज अमरोहा ने डीजीसी महावीर सिंह से 23 फरवरी तक शबनम फांसी केस में रिपोर्ट मांगी थी।

शबनम की वो तीन दलीलें

शबनम के अधिवक्ता ने राज्यपाल से फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग में तीन दलीलें पेश की हैं। इसमें बेटे के अलावा हरियाणा के सोनिया कांड को नजीर बनाते हुए सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की गई है। इसी के साथ देश में अभी तक किसी महिला को फांसी न दिए जाने के तथ्य को भी आधार बनाया है।

1- हरियाणा के सोनिया कांड की दलील

मामला 23 अगस्त 2001 का है। जिसमें विधायक समेत नौ लोगों की हत्या कर दी गई थी। आरोप विधायक पुनिया की बेटी सोनिया और दामाद संजीव पर लगा था। दोनों ने मिलकर रेलूराम पुनिया, उनकी दूसरी पत्नी कृष्णा, बेटी प्रियंका, बेटा सुनील, बहू शकुंतला, चार वर्षीय पोते लोकेश, दो वर्षीय पोती शिवानी और तीन महीने की प्रीति की हत्या कर दी थी। दोषी पाए जाने पर हिसार कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी जिसे हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था। मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई तो दोबारा से दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई। हालांकि दोषियों की दया याचिका के आधा सुप्रीम कोर्ट में जहां से फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो गई थी।

2-देश में किसी महिला को नहीं हुई फांसी

शबनम ने अपनी दलील में इस बात को भी आधार बनाया है कि देश में अभी तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है। शबनम के अलावा पुणे की दो बहनें रेणुका और सीमा को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। दोनों सीरियल किलर हैं और 42 बच्चों की हत्या की दोषी हैं। 24 साल से दोनों पुणे के यरवदा जेल में बंद हैं। हालांकि अभी तक इन्हें सजा नहीं दी गई है।

3- 12 साल के बेट की दलील दी

शबनम ने अपनी दलील में 12 साल के बेटे का भी हवाला दिया है। वारदात को अंजाम देते वक्त शबनम गर्भवती थी। उसने जेल में ही बेटे को जन्म दिया था।
शबनम का बेटा 6 साल 7 माह और 21 दिन मां के साथ जेल में रहा था। बाल कल्याण समिति ने बच्चे की अच्छी परवरिश को लेकर 30 जुलाई 2015 को उसे बुलंदशहर के एक दंपती को सौंप दिया था। पिछले दिनों बेटे ने भी मां की सजा माफ करने के लिए राष्ट्रपति से अपील की थी।

मथुरा जेल में होनी है फांसी

शबनम का डेथ वारंट जारी होने पर उसे रामपुर जेल से फौरन मथुरा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए अलग बैरक तैयार की जाएगी। उसे फांसी मथुरा जेल में दी जाएगी। मथुरा जेल में अग्रेजों के जमाने के बनी यूपी की एक मात्र महिला फांसीघर है। एक साल पहले भी शबनम के फांसी होने के कयास के बीच मथुरा जेल में तैयारी हुई थी। तब मेरठ के पवन जल्लाद को मथुरा फांसीघर का जायजा भी कराया गया। बामनखेड़ी नरसंहार का गुनहगार और शबनम का प्रेमी सलीम प्रयागराज की सेंट्रल जेल में बंद है। उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

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