सपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री पंडित सिंह का कोरोना से निधन, अखिलेश यादव ने जताया दुख

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former minister vinod kumar singh Pandit Singh died from Corona

गोंडा, 07 मई (आशीष श्रीवास्तव)। गोंडा जिले के लोकप्रिय समाजवदी पार्टी के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह की कोरोना संक्रमण से शुक्रवार को निधन हो गया। 59 साल के पंडित सिंह 11 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुए थे और घर पर ही रह रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर 18 अप्रैल को उन्हें लखनऊ के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। करीब 18 दिन जिदंगी और मौत से संघर्ष के बाद वह शुक्रवार को जिंदगी की जंग हार गए।

उनके निधन पर सपा के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता, कई बार के विधायक एवं पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ ‘पंडित सिंह’ जी का निधन, अत्यंत दुखद है। दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

उनके निधन की सूचना से पूरा जिला स्तब्ध रह गया, हर किसी की आंखे शानदार शख्यित के चले जाने से भीगीं रहीं। पूर्व मंत्री पंडित सिंह के निधन की सूचना से हर कोई आवाक रहा और यह मानने को तैयार नहीं कि उनका निधन हो गया है। सत्यता के लिए अखबार दफ्तरों में भी फोन की घंटियां बजती रहीं। सोशल मीडिय पर गरीबों के नायक रहे पूर्व मंत्री के निधन पर शोक की गूंज रही।

पंडित सिंह को जिले में गांव के पगडंडियों की राजनीति को उभारने के लिए जाना जाता है। बेबाकी से राय रखने वाले और बेधक व्यक्तित्व के साथ ही सर्व सुलभ नेता में शुमार पूर्व मंत्री के जाने का दुख सपा के साथ ही अन्य दलों के नेताओं में भी दिखी। नवाबगंज के बल्लीपुर के रहने वाले पंडित सिंह ने राजनीतिक सफर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से 1995 में पार्टी के गठन से ही की थी। सदर विधानसभा से 1996 में विधायक बनकर उभरे पंडित सिंह ने कम समय में जनता की दिल जीतने का काम किया।

वर्ष 2002 में वह फिर सदर विधान सभा सीट से ही विधायक बने और साल 2004 में सपा की सरकार बनने पर चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री बने। इसके बाद 2012 फिर सदर विस से ही विधायक चुने गए और अखिलेश सरकार में राजस्व राज्यमंत्री बने। सीएमओ कांड में उन्होंने इस्तीफा दिया, लेकिन एक साल बाद ही फिर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री बने। सपा के सबसे पुराने और निष्ठावान होने के कारण अखिलेश सरकार के मंत्रीमंडल के तीसरे विस्तार में उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट मंत्री बनाया और कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्रालय सौंपा।

विस चुनाव 2017 में उन्होंने बड़े भाई स्वर्गीय रवींद्र सिंह के बेटे सूरज सिंह को राजनीति में स्थापित करने के लिए सदर विधानसभा छोड़कर सूरज सिंह को टिकट दिलवाया और खुद तरबगंज विधानसभा से चुनाव लड़े। लेकिन चुनाव में सफल नहीं हो सके। इस बार पंचायत चुनाव 2020 में उन्होंने पार्टी समर्थकों के पक्ष में वे प्रचार करने आए तो कोरोना संक्रमित हो गए। फिर भी उन्होंने फोन के जरिए लोगों से अपील किया। 18 अप्रैल से उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, देश के जानेमाने चिक्तिसकों की टीम के निगरानी में इलाज हो रहा था। लेकिन शुक्रवार को उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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