West Bengal: ममता को ‘मिलावटी हिंदू’ बता रहे सुवेंदु, नंदीग्राम में इसी पर मुकाबला!

0
237
Webvarta Desk: पश्चिम बंगाल (West Bengal Election 2021) की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने ‘नरम हिंदुत्व’ (Soft Hindutva) अपनाते हुए बुधवार को कहा था कि वह हिंदू परिवार की बेटी हैं। उन्होंने यहां चंडी पाठ (Chandi Path) भी किया।

चुनाव प्रचार के दौरान हादसे का शिकार होने और अस्पताल में भर्ती कराए जाने से पहले वह (Mamata Banerjee) दो दिनों में 12 मंदिरों में गईं। नंदीग्राम (Nandigram) पहली बार 2000 के दशक में राष्ट्रीय सुर्खियों में आया जब भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था।

इसके बाद यह क्षेत्र उस समय फिर खबरों में आ गया जब मुख्यमंत्री (Mamata Banerjee) ने सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) से मुकाबला करने के लिए नंदीग्राम सीट से ही विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। अधिकारी कभी ममता के करीबी होते थे लेकिन बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। बनर्जी इस हफ्ते नंदीग्राम में अपने चुनाव प्रचार के दौरान 12 मंदिरों और एक मजार पर गईं लेकिन हादसे में घायल हो जाने के कारण उन्हें अपनी यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी।

‘मिलावटी हिंदू ममता’

अधिकारी ने दावा किया कि ममता ने सही तरीके से चंडी पाठ नहीं किया। उन्होंने ममता को ‘मिलावटी हिंदू बताया जो तुष्टीकरण की राजनीति के पाप से अलग नहीं हो सकतीं।’ ममता के मंदिरों का दौरा करने और रैली में श्लोकों के पाठ को बीजेपी के आक्रामक हिंदुत्व का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही उनके कथित मुस्लिम पक्षपात की आलोचना को भी रोकने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

उन्होंने मंगलवार को एक रैली में कहा, ‘मेरे साथ हिंदू कार्ड मत खेलो।’ नंदीग्राम में 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है, जो पिछले एक दशक में तृणमूल के साथ है। अधिकारी की नजर शेष 70 फीसदी मतों पर है और इससे हिंदू वोटों की लड़ाई तेज होती दिख रही है। अधिकारी अपनी चुनावी रैलियों में अक्सर कहते हैं कि उन्हें ’70 प्रतिशत मतदाताओं पर पूरा विश्वास है और शेष 30 प्रतिशत को लेकर वह चिंतित नहीं हैं।’

‘हिंद समर्थन में सेंध की कोशिश’

हालांकि, तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं का जोर है कि ममता की मंदिरों की यात्रा पार्टी की ‘समावेशी नीतियों’ का हिस्सा है। वहीं प्रतिद्वंद्वी बीजेपी का कहना है कि इसका मकसद भगवा पार्टी के हिंदू समर्थन आधार में सेंध लगाना है क्योंकि उन्होंने महसूस कर लिया है कि केवल मुस्लिम वोट विजय के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

शुरू में फुरफुरा शरीफ के मौलवी अब्बास सिद्दीकी की पार्टी आईएसएफ को वाम नेतृत्व वाले महागठबंधन के हिस्से के रूप में यहां से उम्मीदवार उतारना था। लेकिन इस कदम से मुस्लिम वोटों में विभाजन हो सकता था। हालांकि, बाद में गठबंधन ने यह सीट एनसीपी के लिए छोड़ने पर सहमति व्यक्त की और उसने तृणमूल को राहत देते हुए मीनाक्षी मुखर्जी को मैदान में उतारा है जो एनसीपी की युवा शाखा डीवाईएफआई की राज्य अध्यक्ष हैं।

‘शुभेंद्र विश्वासघाती’

वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा, ‘हम बीजेपी के विपरीत सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं। शुभेंद्र विश्वासघाती हैं और उन सभी आदर्शों को भूल गए हैं जो उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल में सीखे थे। यही कारण है कि वह इसे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच लड़ाई बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा कोई धार्मिक एजेंडा नहीं है।’

इस पर पलटवार करते हुए अधिकारी ने मुख्यमंत्री के इतने मंदिरों की यात्रा करने की आवश्यकता पर सवाल किया। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने एक विशिष्ट समुदाय की 30 प्रतिशत आबादी के कारण इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। आप उन नेताओं को देखिए जो नंदीग्राम में उनके साथ घूम रहे हैं और आप समझ जाएंगे।’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here