ब्लैक फंगस से लड़ने वाले इंजेक्शन की कालाबाजारी, 4 गिरफ्तार

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Amphotericin B Injection

अहमदाबाद, 21 मई (कल्पेश मोदी)। ब्लैक फंगस के रोगियों को लगने वाले इंजेक्शन की कालाबाजारी जोरों पर चल रही है। ये ठग रोगियों के परिजनों को ब्लैक फंगस में लगने वाले इंजेक्शनों को उपलब्ध कराने के नाम पर रुपये ठगने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने चार लोगों को एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा है।

ब्लैक फंगस इंजेक्शन की कालाबाजारी…

जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने चार लोगों को एम्फोटेरिसिन बी नामक इंजेक्शन जिसे ब्लैक फंगस के इलाज में अहम माना जाता है, उसकी कालाबाजारी करते हुए पकड़ा है। क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 8 इंजेक्शन जब्त किए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह एक इंजेक्शन 10 हजार रुपये में बेच रहे थे। पुलिस फिलहाल मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

अहमदाबाद शहर में कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस की बीमारी भी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए अब कोरोना के बाद इस बीमारी के इलाज में अहम एम्फोटेरिसिन बी नामक इंजेक्शन की कालाबाजारी भी बढ़ती जा रही है। इससे पहले लोग रेमेडिसिविर और ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे थे। उन्हें भी महंगे दाम में बेच चूना लगाने का काम कर रहे थे। अब जब कोरोना काबू में है और ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में कालाबाजारी करने वालों को फिर अपना धंधा चमकाने का मौका मिल गया है।

10,000 रुपये में बेच जा रहे थे इंजेक्शन…

अहमदाबाद क्राइम ब्रान्च को मिली सूचना के मुताबिक प्रग्नेश पटेल और स्मित रावल नाम के आरोपी ब्लैक फंगस की बीमारी में अहम भूमिका अदा करने वाले एम्फोटेरिसिन बी नामक इंजेक्शन को बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर बेचते थे। क्राइम ब्रांच की टीम ने जाल बिछाकर प्रग्नेश पटेल, वशिष्ठ पटेल, नीरव पांचाल और स्मित रावल को गिरफ्तार कर लिया। चारों आरोपियों के पास से एम्फोटेरिसिन बी के आठ इंजेक्शन और 80 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। क्राइम ब्रांच की पूछताछ में पता चला कि इस इंजेक्शन की कीमत 314 रुपया है। लेकिन ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को ये इंजेक्शन 10,000 रुपये में बेच जा रहे थे।

ये है इंजेक्शन

ब्लैक फंगस वाले मरीजों को फरीदाबाद के डॉक्टरों द्वारा इंजेक्शन लिखा जा रहा है, उसका नाम एमपोटरीसिन-बी है। 50 एमजी के इस इंजेक्शन की कीमत वैसे साढ़े चार हजार रुपये बताई जा रही है, लेकिन ब्लैक में यह इंजेक्शन 15 हजार रुपये तक में बिक रहा है। उसके बाद भी मरीजों को इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो रहा है। मरीजों के परिजन भटकते फिर रहे हैं। निजी अस्पताल संचालक भी इंजेक्शन को लेकर मरीजों पर ही छोड़ रहे हैं कि वे कहीं से भी लाएं।

गंभीर बीमारी है

नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. शिल्पी का कहना है कि म्यूकर माइकोसिस इंफेक्शन अर्थात ब्लैक फंगस एक गंभीर बीमारी है, जो संक्रमित शरीर के अंदर तेजी से फैलती है। उन्होंने बताया कि कैंसर, डायबिटीज, हार्ट, अस्थमा और टीबी जैसी घातक बीमारियों के साथ-साथ कोरोना की बीमारी भी है तो उन्हें ब्लैक फंगस की बीमारी से ज्यादा सचेत रहने की आवश्यकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इस ब्लैक फंगस जैसी बीमारी से अधिक सचेत रहना है।

ब्लैक फंगस मरीज के दिमाग, फैंफड़े, स्किन पर सीधे अटैक करता है और आंखों की रोशनी तक इस रोग के कारण जा सकती है। ऐसे में मरीज को यदि किसी भी रूप से पलकों पर सूजन दिखाई देती है तो आवश्यक चिकित्सक से जांच करवाते हुए सजगता बरतकर बचाव का सशक्त माध्यम अपनाएं। कोरोना महामारी के कारण विकसित हो रहे ब्लैक फंगस बीमारी से बचाव के लिए मरीज ब्लड ग्लूकोज पर नजर अवश्य रखें।

साथ ही स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय व डोस का पूरा ध्यान रखा जाए। ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान स्टेराइल वाटर का प्रयोग करें। एंटी बॉयोटिक्स व एंटी फंगल दवाइयों का सावधानी से इस्तेमाल करें और ब्लड शुगर की मात्रा नियंत्रित रखें। यदि किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार की बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं तो वह तुरंत स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों से भी संपर्क करें ताकि समय रहते इसका इलाज संभव हो सके।

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