मुख्यमंत्री ने महान धावक मिल्खा सिंह के निधन पर दुख प्रकट किया

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bhupesh baghel

Raipur: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारत के महान धावक ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि मिल्खा सिंह देश के हजारों खिलाड़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से खेल जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। बघेल ने उनके परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

रायपुर हाफ मैराथन में मिल्खा के साथ 85 साल के बुजुर्ग भी दौड़े थे

साल 2017 में नया रायपुर में हुए पहले रायपुर इंटरनेशनल हाफ मैराथन में मिल्‍खा सिंह भी शामिल हुए थे। करीब 15 हजार धावक शामिल हुए थे। इसमें 3 साल से 85 साल तक की उम्र के धावक थे। विजेताओं को 30 लाख की इनामी राशि बांटी गई थी। दौड़ में पूर्व ओलिंपियन धावक मिल्खा सिंह, पहलवान गीता फोगाट, क्रिकेटर प्रवीण कुमार सहित कई सितारे शामिल हुए थे।

‘उड़न सिख’ पद्मश्री मिल्खा सिंह

बता दें कि खेल की दुनिया में देश को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले ‘उड़न सिख’ पद्मश्री मिल्खा सिंह शुक्रवार रात 11.24 बजे अलविदा कह गए। चंडीगढ़ के परास्नातक आयुर्र्विज्ञान संस्थान (पीजीआइ) में उन्होंने 91 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वह कोरोना से उबर चुके थे, लेकिन पोस्ट कोरोना साइड इफेक्ट के कारण गुरुवार रात से उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी।

डाक्टर उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे, लेकिन विफल रहे। बीते दिनों उनकी पत्नी का भी कोरोना से निधन हो गया था। उनकी पत्नी भारत की वॉलीबाल टीम की कप्तान रही थीं। मिल्खा सिंह के परिवार में पुत्र जीव मिल्खा और तीन बेटियां हैं। जीव मिल्खा देश के नामी गोल्फर हैं।

चार एशियाई खेलों में जीते स्वर्ण

दुनिया के महान एथलीटों में शुमार मिल्खा सिंह ने चार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे। वह 1958 के कामनवेल्थ गेम्स के चैंपियन भी थे। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन 1960 रोम ओलंपिक खेल में था जहां वह 4-मीटर स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने 1956 और 1964 के ओलंपिक खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें 1959 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके जीवन पर बालीवुड फिल्म भाग मिल्खा भाग बनी थी जो सुपरहिट रही थी।

बेटी भी कर रही थी इलाज

मिल्खा सिंह के इलाज में लगी सीनियर डाक्टरों की टीम में उनकी बेटी मोना भी शामिल थीं। मोना न्यूयार्क स्थित मेट्रोपोलिटन अस्पताल में सीनियर इमरजेंसी मेडिसिन डाक्टर हैं। वह अमेरिका में कोरोना मरीजों की जिंदगी बचाने में पिछले एक साल से जुटी हुई हैं। जैसे ही उन्हें पिता मिल्खा सिह के कोरोना पाजिटिव होने की खबर मिली, वह भारत आ गईं थीं और उनकी देखरेख में जुटी थीं।

आक्सीजन स्तर गिरने के बाद आया बुखार

पीजीआइ प्रवक्ता प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि गुरुवार रात को मिल्खा सिंह का आक्सीजन स्तर गिर गया था और उन्हें बुखार भी आ रहा था। बुधवार को उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी, जिसके बाद उन्हें आइसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था।

17 मई को हुए थे कोरोना पाजिटिव

बता दें, 17 मई को मिल्खा सिंह की कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद पहले उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहां कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 31 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद वह चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित घर में कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए आराम कर रहे थे। अचानक तीन जून को उनकी तबीयत बिगड़ गई और आक्सीजन लेवल गिरने के बाद उन्हें पीजीआइ में भर्ती करवाया गया।

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