भगवा पगड़ी पहन G-23 बागियों की सोनिया-राहुल के खिलाफ हुंकार- हम बताएंगे कांग्रेस क्या है

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Webvarta Desk: एक ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) चुनावी राज्य तमिलनाडु (Tamilnadu) का दौरा कर रहे हैं, वहीं जम्मू में पार्टी के असंतुष्ट नेता (Congress G23 Leaders) एक कार्यक्रम (Shanti Sammelan In Jammu) में इकट्ठा हुए। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कांग्रेस के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस उन्हें कमजोर होती दिख रही है।

उन्होंने गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) को दोबारा राज्यसभा के लिए नामित न किए जाने पर भी सवाल उठाए। इस कार्यक्रम में सोनिया-राहुल (Rahul Sonia Gandhi) के पोस्टर नहीं थे। कार्यक्रम के मंच पर गांधी ग्लोबल लिखा था।

पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के नेतृत्व में कांग्रेस के कई नेता जम्मू के शांति सम्मेलन (Shanti Sammelan In Jammu) में पहुंचे जिसे गांधी ग्लोबल फैमिली नामक एक एनजीओ (Gandhi Global NGO) ने आयोजित किया है। इस दौरान कांग्रेस के सभी नेता भगवा साफे में नजर आए।

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा, ‘हम नहीं चाहते थे कि गुलाम नबी आजाद साहब को संसद से आजादी मिले। क्योंकि मैं समझता हूं कि जबसे वह राजनीति में आए कोई ऐसा मंत्रालय नहीं रहा, जिसमें वह मंत्री नहीं रहे। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस अनुभव को कांग्रेस पार्टी इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही है।’

सच बोलने का मौका है, सच बोलेंगे- सिब्बल

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा, ‘सच बोलने का मौका है और आज सच ही बोलेंगे। हम क्यों यहां इकट्ठा हुए हैं। सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस पार्टी हमें कमजोर होती दिख रही है। इसलिए हम यहां इकट्ठा हुए हैं। पहले भी इकट्ठा हुए थे। हमें इकट्ठा होकर इसे मजबूत करना है। हम नहीं चाहते थे कि गुलाम नबी आजाद साहब को संसद से आजादी मिले।’

‘कांग्रेस अनुभव का इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही’

सिब्बल ने आगे कहा, ‘पूछिए क्यों? क्योंकि मैं समझता हूं कि जबसे वह राजनीति में आए कोई ऐसा मंत्रालय नहीं रहा, जिसमें वह मंत्री नहीं रहे। कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसको वह जानते नहीं हैं। टेलिफोन पर जब किसी भी नेता को फोन करते थे, तो उनके यहां आकर बैठक करते थे। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस अनुभव को कांग्रेस पार्टी इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही है।’

हमें कोई न बताए कि हम कांग्रेसी हैं या नहीं- आनंद शर्मा

पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा, ‘हममें से कोई ऊपर से नहीं आया। खिड़की रोशनदान से नहीं आया। दरवाजे से आए हैं। चलकर आए हैं। छात्र आंदोलन से आए हैं। युवक आंदोलन से आए हैं। यह अधिकार मैंने किसी को नहीं दिया कि मेरे जीवन में कोई बताए कि हम कांग्रेसी हैं कि नहीं हैं। यह हक किसी का नहीं है। हम बता सकते हैं कांग्रेस क्या है। हम बनाएंगे कांग्रेस को।’

आनंद शर्मा ने आगे कहा, ‘पिछले 10 सालों में कांग्रेस कमजोर हुई है। दो भाई अलग-अलग मत रखते हों, तो इसका मतलब यह नहीं है कि घर टूट जाएगा। या भाई, भाई का दुश्मन हो जाता है, ऐसा तो नहीं हो जाता है। अगर कोई अपना मत न व्यक्त करे कि उसका कोई क्या मतलब न निकाल ले, फिर वह घर मजबूत नहीं रहता है।’

‘जम्मू- कश्मीर के मुद्दे पर इन सभी ने बोला’

इससे पहले गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘पिछले 5-6 साल से इन सभी दोस्तों ने जम्मू-कश्मीर को लेकर, यहां की बेरोजगारी, राज्य का दर्जा छीनने, इंडस्ट्री को खत्म करने, शिक्षा और जीएसटी लागू करने के मुद्दे लेकर संसद में मुझसे कम नहीं बोला है। चाहे जम्मू हो या कश्मीर या लद्दाख, हम सभी धर्म, लोगों और जाति का सम्मान करते हैं। हर एक समान रूप से सभी का आदर करते हैं। यह हमारी ताकत है और इसे हम आगे भी जारी रखेंगे।’

‘जी-23 चाहता है कि कांग्रेस मजबूत बने’

इस मौके पर यूपी कांग्रेस के पूर्व चीफ और जी-23 के नेता राजबब्बर भी मौजूद थे। राज बब्बर ने मंच से कहा, ‘लोग कहते हैं, जी 23, मैं कहता हूं गांधी 23। महात्मा गांधी के विश्वास, संकल्प और सोच के साथ, इस देश के कानून और संविधान का गठन किया गया था। कांग्रेस इसे आगे ले जाने के लिए मजबूती से खड़ी है। जी 23 चाहता है कि कांग्रेस मजबूत बने।’

गुलाम नबी के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे ये नेता

इस समारोह में गुलाम नबी आजाद और राज बब्बर के अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, विवेक तन्खा और भूपिंदर सिंह हुड्डा मौजूद हैं। गुलाम नबी गांधी ग्लोबल फैमिली एनजीओ के प्रमुख हैं। माना जा रहा था कि ये नेता कांग्रेस के कामकाज पर सवाल उठा सकते हैं।

राहुल के बयान से नाखुश है जी-23!

यह भी कहा जा रहा है कांग्रेस में अंसतुष्ट नेताओं का समूह राहुल गांधी के हालिया ‘उत्तर-दक्षिण की राजनीति’ वाली टिप्पणी से नाखुश है। कांग्रेस के ये नेता गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा के लिए फिर से नामित न किए जाने से भी नाराज हैं। पिछले दिनों गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल समाप्त हो गया था जिसके बाद उन्हें विदाई दी गई। आजाद की विदाई समारोह में पीएम मोदी ने सदन में उनकी काफी तारीफ की थी। इसके कई मायने निकाले गए थे।

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