उत्तराखंड : कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री इंदिरा हृदयेश का दिल्ली में निधन

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congress leader indira hridayesh

New Delhi: उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और प्रदेश की नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश का सुबह दिल्ली में हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनके निधन के बाद कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। अपने राजनीतिक करियर में इंदिरा हृदयेश ने उत्तराखंड की राजनीति को कई नए मुकाम दिए और प्रदेश में काफी कुछ विकास के काम किए, खासकर कुमाऊं मंडल में उनको मदद का मसीहा माना जाता रहा है।

कांग्रेस संगठन की बैठक में शामिल होने गईं थीं

बता दें कि वह दिल्ली में कांग्रेस संगठन की बैठक में शामिल होने गईं थीं। जहां रविवार की सुबह उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका निधन हो गया। कुछ समय पहले ही नेता प्रतिपक्ष कोरोना से उभरी थीं और उनकी हार्ट संबंधी सर्जरी भी हुई थी। उनके बेटे सुमित भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनके शव को उत्तराखंड ले जाने की तैयारी हो रही है।

उनके निधन पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं। राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा “उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की एक मज़बूत कड़ी, डॉ इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुखद समाचार मिला। वे अंत तक जन सेवा एवं कांग्रेस परिवार के लिए कार्यरत रहीं। उनके सामाजिक व राजनीतिक योगदान प्रेरणास्रोत हैं। उनके प्रियजनों को शोक संवेदनाएँ।”


कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट कर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री के निधन पर शोक जताया है, प्रियंका ने ट्वीट किया “कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं उत्तराखंड विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुखद समाचार मिला। आज हमने एक जुझारू नेता, जनप्रिय प्रतिनिधि एवं अभिभावक को खो दिया। ईश्वर उनको श्रीचरणों में स्थान दें एवं इस दुख की घड़ी में परिजनों को कष्ट सहने का साहस दें।


पीएम मोदी ने जाहिर किया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंदिरा हृदयेश की मौत पर दुख जाहिर किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक संदेश पोस्ट किया है।


राजनीतिक जगत में शोक

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने वरिष्ठ राजनेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति व शोक संतप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। इंदिरा हृदयेश ने पिछले चार दशक से यूपी से लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई। वे एक कुशल प्रशासक, वरिष्ठ राजनीतिज्ञ व संसदीय ज्ञान की जानकार थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. इंदिरा हृदयेश से मेरा परिचय दशकों पुराना रहा है। उनसे सदा मुझे बड़ी बहन जैसी आत्मीयता मिली। विधानसभा में जनहित के मुद्दे उठाने में वे सदा अग्रणी रहती थीं। मैं इस कठिन समय में उनके परिजनों व समर्थकों के प्रति अपनी सांत्वना व्यक्त करता हूं।

उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके निधन से पार्टी को नुकसान पहुंचा है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं हो पाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित पूर्व विधायकों ने भी डॉ. हृदयेश के निधन पर गहर दुख व्यक्त किया है।


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी डॉ. हृदयेश के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्विट कर कहा कि अभी-अभी कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री डॉक्टर इंदिरा हृदयेश जी के निधन का दुःखद समाचार मिलकर मन अत्यंत दुखी है। इन्दिरा बहिन जी ने अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में कई पदों को सुशोभित किया और विधायिका के कार्य में पारंगत हासिल की। बहिन जी का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।


कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने डॉ. हृदयेश को बड़ी बहन कहते हुए कहा कि इंदिरा जी का निधन सम्पूर्ण प्रदेश-समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। शोक संतप्त परिवारजनों, समर्थकों के प्रति गहरी संवेदनायें व्यक्त की है।

वहीं दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश के समय से राजनीति में डॉ. इंदिरा के अनुभवों का लाभ मिलता रहा है, आज उनके असमय चले जाने से प्रदेश को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई असंभव है।

इंदिरा हृदयेश के निधन का समाचार बहुत पीड़ादायक

राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने स्व. इंदिरा हृदयेश के निधन पर दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री और उत्तराखंड की संसदीय राजनीति की महत्वपूर्ण अध्याय डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन का समाचार बहुत पीड़ादायक है। व्यवहार कुशल, निर्विवाद और ममतामयी इंदिरा को मेरी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

राजनीतिक सफर

इंदिरा हृदयेश के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1974 में उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में पहली बार चुनी गईं जिसके बाद 1986, 1992 और 1998 में इंदिरा ह्रदयेश लगातार चार बार अविभाजित उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं। साल 2000 में अंतरिम उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बनीं और प्रखरता से उत्तराखंड के मुद्दों को सदन में रखा।

साल 2002 में उत्तराखंड में जब पहले विधानसभा चुनाव हुए तो हल्द्वानी से विधानसभा का चुनाव जीतीं और नेता प्रतिपक्ष बन विधानसभा पहुंचीं जहां उन्हें एनडी तिवारी सरकार में संसदीय कार्य , लोक निर्माण विभाग समेत कई महत्वपूर्ण विभागों को देखने का मौका मिला। एनडी तिवारी सरकार में इंदिरा का इतना बोलबाला था कि कि उन्हें सुपर मुख्यमंत्री तक कहा जाता था उस समय तिवारी सरकार में ये प्रचलित था कि इंदिरा जो कह दें वह पत्थर की लकीर हुआ करती थी।

2007 से 12 के टर्न में इंदिरा हृदयेश चुनाव नहीं जीत सकीं लेकिन 2012 में एक बार फिर वह विधानसभा चुनाव जीतीं और विजय बहुगुणा तथा हरीश रावत सरकार में वित्त मंत्री व संसदीय कार्य समेत कई महत्वपूर्ण विभाग इंदिरा हृदयेश ने देखें। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में इंदिरा ह्रदयेश एक बार फिर हल्द्वानी से जीतकर पहुंचीं। कांग्रेस विपक्ष में बैठी तो नेता प्रतिपक्ष के रूप में इंदिरा ह्रदयेश को पार्टी का नेतृत्व करने का मौका मिला। इंदिरा हृदयेश एक मजबूत इरादों की महिला कहीं जाती रही हैं और उन्हें उत्तराखंड की राजनीति की आयरन लेडी भी कहा जाता रहा।

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