दिल्ली का फोर्टिस ला फेम FOGSI का मान्यता प्रमाणन पानेवाला पहला अस्पताल बना

0
53
Fortis La Fame

नई दिल्ली, (वेबवार्ता)। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर गर्भवती महिलाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इसके मद्देनजर दिल्ली का फोर्टिस-ला फैम अस्पताल मान्यता प्रमाणन प्राप्त करने वाला दिल्ली का पहला अस्पताल बन गया है।

मान्याता फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक ऐंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (एफओजीएसआई) द्वारा एक गुणवत्ता सुधार और प्रमाणन पहल है जो निजी सुविधाओं को डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित गुणवत्ता देखभाल मानकों का पालन करना सुनिश्चित करती है और अपने रोगियों को सुरक्षित और सम्मानजनक देखभाल प्रदान करती है।

यह पहल 16 नैदानिक मानकों के एक व्यापक पाठ्यक्रम के जरिए डॉक्टरों और नर्सों की एक कुशल और सक्षम टीम के निर्माण पर केंद्रित है। यह प्रसवपूर्व देखभाल से लेकर प्रसवोत्तर परिवार नियोजन परामर्श तक गर्भावस्था के हर पहलू को कवर करती है। इस पहल के तहत प्रदान किए गए गुणवत्ता सुधार प्रशिक्षण ने नर्सों के व्यवहार और गर्भवती माताओं का प्रबंधन करने के तरीके में महत्वपूर्ण अंतर पैदा किया है। खासकर पीपीएच (प्रसवोत्तर रक्तस्राव), एक्लैम्प्सिया आदि जैसी जीवन के लिए खतरनाक जटिलताओं के प्रबंधन में इसका लाभ मिला है।

फोर्टिस ला फैम अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग और बांझपन विशेषज्ञ डॉ सुनीता अरोड़ा ने कहा कि, “एनएबीएच और एनएबीएच उत्कृष्टता मान्यता के साथ फोर्टिस-ला फैम एक महिला के जीवन के सभी चरणों के लिए गुणवत्ता देखभाल की सुविधा के लिए समर्पित है। हमारे जैसे अस्पताल में पहले से ही प्रोटोकॉल थे। इस मान्यता ने हमें न केवल उन प्रोटोकॉल पर फिर से जोर देने का मौका दिया, बल्कि हमें पहले की तुलना में अधिक संगठित होने का भी अवसर प्रदान किया और आत्मनिरीक्षण करने में मदद की। यह पाठ्यक्रम बहुत व्यापक है और इसके प्रशिक्षण सत्रों को बेहतरीन तरीके से गढ़ा गया है। इसमें सब कुछ बहुत ही सरल तरीके से और बहुत गहराई से समझाया गया है। कुल मिलाकर यह हमारे नर्सिंग स्टाफ के लिए एक संतोषजनक कार्यक्रम रहा है। मैं दूसरों को भी इस मान्यता प्रशिक्षण से गुजरने की सलाह दूँगी।”

जाने-माने स्त्री रोग और बांझपन विशेषज्ञ, डॉ हृषिकेश पै, जो इस पहल के मुख्य प्रशासक भी हैं, ने कहा कि, “मान्यता पहल का उद्देश्य देश की मातृ और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं का समर्थन करना है और यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को वह गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिले जिसके वे हकदार हैं। मान्यता प्रमाणन गुणवत्ता में सुधार के लिए नैदानिक मानकों पर कठोर प्रशिक्षण और मूल्यांकन के और भी कड़े दौर पर आधारित है ताकि प्रमाणीकरण केवल उन सुविधाओं को प्रदान किया जा सके जो देखभाल का उच्चतम स्तर प्रदान कर रहे हैं।”

रेनबो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के निदेशक, डॉ जयदीप मल्होत्रा, जिन्होंने फोर्टिस-ला फैम के लिए गुणवत्ता सुधार प्रशिक्षण का नेतृत्व किया, ने कहा कि, “फोर्टिस-ला फैम पूरे प्रशिक्षण और आकलन के दौरान बहुत सहयोगी और उत्साही रहा है। वे पहले से ही अधिकांश प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे और इसलिए गुणवत्ता सुधार प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित की गई थी। अब हम राजधानी और अन्य राज्यों में अधिक अस्पतालों को प्रमाणित करने का लक्ष्य बना रहे हैं ताकि महिलाओं को देश के कोने-कोने में गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक समान पहुँच प्राप्त हो सके। मेरा मानना है कि एक माँ का स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण और उतना ही कीमती है जितना कि उसके बच्चे का स्वास्थ्य और उसकी भलाई हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

कोविड-19 महामारी ने देश में मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की तत्काल जरूरत को और अधिक जरूरी बना दिया है। ऐसे समय में खासकर दुर्गम क्षेत्रों में वंचित समुदायों के लिए मान्यता भारत सरकार के सार्वभौमिक पूरक के लिए डिजिटल हस्तक्षेप की ताकत का इस्तेमाल कर रही है। स्वास्थ्य कवरेज की महत्वाकांक्षाएं और एसडीजी 3.1 के लक्ष्य को वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 प्रति 100,000 जीवित जन्म तक कम करने के लक्ष्य को पूरा करना है। वर्तमान में यह पहल भारत के 14 राज्यों में चल रही है। अब तक यह कुल 1058 सुविधाओं को प्रमाणित कर चुकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here