Eid al-Adha 2021: राष्ट्रपति कोविंद और PM मोदी ने की ईद-उल-जुहा की बधाई, जानें कुर्बानी और बकरीद का महत्व

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Matrubhasha Desk: Eid al-Adha 2021: देशभर में ईद-उल-जुहा (Bakrid 2021) मनाई जा रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने  कहा कि ईद-उल-जुहा प्रेम, निस्वार्थता और बलिदान का भावना के प्रति आभार व्यक्त करने और समाज में एकता और भाईचारे के लिए मिलकर काम करने का त्योहार है। बकरीद या फिर कहें ईद उल जुहा का पर्व मुस्लिम समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। इसका संबंध कुर्बानी से है। कुर्बानी का असल अर्थ बलिदान है, जो दूसरों के लिए दिया गया हो। राष्ट्रपति ने सभी से कोविड-19 के प्रसार के रोकने के उपायों को अपनाकर इस महामारी से लड़ने के संकल्प की अपील की।

वहीं पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी देशवासियों को ईद (Eid al-Adha 2021) की बधाई दी है। पीएम ने कहा- ईद मुबारक। ईद उल जुहा पर शुभकामनाएं। उम्मीद करता हूं, यह दिन समाज के भले के लिए सामूहिक सद्भाव, लगाव और सबको साथ लेकर चलने की भावना को बढ़ाएगा।

इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने भी मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि ईद आपसी भाईचारे और त्याग की भावना का प्रतीक है। ईद हम सबके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाए यही कामना है। वहीं कांग्रेस के नेता राहुल गांधी आप सभी ईद उल अजहा मुबारक हो।

बता दें कि आज देशभर में ईद-अल-अजहा (Eid al-Adha 2021) या बकरीद (Bakrid 2021) का त्योहार मनाया जा रहा है। इसको लेकर बीते कई दिनों से तैयारियां जोरों पर थी। बकरीद के त्योहार को कुर्बानी के दिन के रूप में भी याद किया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रमजान के दो महीने बाद कुर्बानी का त्योहार बकरीद आता है।

बकरीद पर दी जाएगी कुर्बानी

हमारे देश के अलावा किसी भी और जगह पर ईद-अल-अजहा को बकरीद नहीं कहा जाता है। आज के दिन आमतौर पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है, इसलिए हमारे देश में इसे बकरीद भी कहते हैं। आज के दिन बकरे को अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया जाता हैं। इस धार्मिक प्रक्रिया को फर्ज-ए-कुर्बान कहा जाता है।
इस साल ये है तैयारी

देशभर में इस साल 21 जुलाई को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास मौके पर ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज सुबह 6 बजे से लेकर 10।30 बजे तक अदा करने की तैयारी है। बता दें कि बीते साल कोरोना संक्रमण की भयावयता की वजह से लोगों को घर से ही नमाज अदा करनी पड़ी थी।

बकरीद का महत्व 

रमजान की ईद के 70 दिनों बाद बकरीद मनाई जाती है। बकरीद को ईद-अल-अजहा या फिर ईद-उल-जुहा भी कहा जाता है। आज के दिन नमाज अदा करने के बाद बकरों की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी पर गरीबों का खास ख्याल रखा जाता है। कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। जिसका एक हिस्सा  गरीबों को दिया जाता है, दूसरे हिस्से को दोस्तों, सगे संबंधियों में बांटा जाता है। वहीं तीसरे हिस्से को खुद के लिए रखा जाता है।

ईद-अल-अजहा या बकरीद मनाए जाने के पीछे मुसलमानों का मानना है कि पैगंबर इब्राहिम की कठिन परीक्षा ली गई थी। इसके लिए अल्लाह ने उनको अपने बेटे पैगम्बर इस्माइल की कुर्बानी देने को कहा था। इसके बाद इब्राहिम आदेश का पालन करने को तैयार हुए। वहीं बेटे की कुर्बानी से पहले ही अल्लाह ने उनके हाथ को रोक दिया। इसके बाद उन्हें एक जानवर जैसे भेड़ या मेमना की कुर्बानी करने को कहा गया। इस प्रकार उस दिन से लोग बकरीद को मनाते आ रहे हैं।

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