जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी का इंतिकाल

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-नमाज-ए-जनाजा दिल्ली में दफीना देवबंद दौड़ी शोक की लहर

-जमीयत महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि आज उन्होंने अपने सच्चे गुरु को खो दिया

नई दिल्ली, 21 मई (वेबवार्ता)। जमीयत उलमा-ए-हिंद (महमूद मदनी समूह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी का कोविड-19 की जटिलताओं के कारण गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इंतकाल हो गया। उनकी नमाज-ए-जनाजा जमीयत उलमा-ए-हिंद के दिल्ली हेड क्वार्टर की मस्जिद अब्दुल नबी में अदा की गई। नमाज के बाद जनाजा देवबंद ले जाया गया।

मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी करीब पिछले 15 दिनों से बीमार थे, उनकी करोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी, उसके बाद से उनका लगातार देवबंद में मौजूद घर पर इलाज चल रहा था। इस दौरान उनकी कोरोना रिपोर्ट तो निगेटिव आ गई थी लेकिन हालात में सुधार नहीं हो रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने की वजह से डाक्टरों की सलाह पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां आज दोपहर 76 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।

यह जानकारी उनके बेटों मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी और मुफ्ती अफफान मंसूरपुरी ने दी है। कारी उस्मान मंसूरपुर के निधन से दारुल उलूम देवबंद और जमीअत उलमा हिंद को ना सिर्फ बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, बल्कि उनका इंतकाल पूरी उम्मत के लिए बहुत बड़ा नुकसान है, उनके इंतकाल पर चारों तरफ शोक का माहौल है। उनके इंतकाल ने दारुल उलूम देवबंद और जमीअत उलमा-ए-हिंद सहित देश और दुनिया में फैले उनके लाखों चाहने वालों को गमगीन कर दिया है। कारी उस्मान मंसूरपुरी के जनाजे को दिल्ली से देवबंद लाया जा रहा है, और देर शाम देवबंद में मौजूद क़ासमी क़ब्रिस्तान में उन्हें सपुर्द ए खाक किया जाएगा।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बताया कि मंसूरपुरी दारूल उलूम देवबंद के कार्यकारी रेक्टर भी थे और विश्व प्रख्यात मदरसे के सबसे वरिष्ठ शिक्षकों में शामिल थे। संगठन ने एक बयान में बताया कि 76 वर्षीय मसूंरपुरी ने 2008 में आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी करने में अहम किरदार निभाया था और फिर पूरे देश में आतंकवाद विरोधी आंदोलन की अगुवाई की थी।

बयान के मुताबिक, वह हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े हिमायती थे और उन्होंने दोनों समुदायों के प्रभावशाली नेताओं को एक साथ लाने के लिए जमीयत के तत्वावधान में ‘सद्भावना मंच’ भी बनाया था। उसमें बताया गया है कि 12 अगस्त 1944 को जन्मे मंसूरपुरी 2008 से जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी समूह) के अध्यक्ष थे। उनका ताल्लुक उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में स्थित मंसूरपुर के नवाब खानदान से था। संगठन ने बताया कि उन्हें 2010 में इमारत-ए-शरीयत के बैनर तले अमीर-उल-हिंद भी चुना गया था।

गौरतलब है कि लंबे समय से जमीयत दो फाड़ रही। इसमें एक जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी तो दूसरे गुट में महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कारी उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष बनाया। दोनों गुटों का मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था। दारुल उलूम देवबंद की सुप्रीम कमेटी मजलिस ए शूरा ने अक्तूबर माह में मौलाना अरशद मदनी और कारी उस्मान मंसूरपुरी को जिम्मेदारी सौंपी थी। दोनों गुटों के अध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपना सुलह के लिए अहम कदम माना गया था।

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