Cyclonic Storm YAAS : तूफान ‘यास’ से निपटने को लेकर पीएम मोदी ने 14 विभागों के साथ मीटिंग की

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pm modi on cyclone yaas

नई दिल्ली, 23 मई (वेबवार्ता)। देश के कई राज्यों में तूफान ताऊ ते के बाद अब चक्रवात यास (Cyclonic Storm YAAS) का खतरा मंडरा रहा है। चक्रवात यास 26 मई को ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों से टकरा सकता है। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Modi) ने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) समेत 14 विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने तूफान से निपटने की तैयारियों का रिव्यू किया।

मीटिंग में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पुड्डुचेरी के चीफ सेक्रेटरी और अफसर शामिल हुए। इसमें रेलवे बोर्ड चेयरमैन, एनडीएमए के सचिव, IDF चीफ के साथ गृह, पावर, शिपिंग, टेलिकॉम, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सिविल एविएशन और फिशरीज मंत्रालय के सचिव भी मौजूद रहे। बैठक में कोस्ट गार्ड, एनडीआरएफ और आईएमडी (मौसम विभाग) के डीजी भी शामिल हुए।

बेहतर समन्वय के साथ काम करें

अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Modi) ने निर्देश दिया कि राज्यों के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया जाए और हाई रिस्क वाले इलाकों से लोगों को सही-सलामत निकालने के इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि तूफान की वजह से पावर और कम्यूनिकेशन आउटेज की समय-सीमा कैसे कम से कम की जाए, इस पर काम किया जाए। इसे जल्द से जल्द बहाल करने की व्यवस्था पर काम किया जाए।

कोरोना के इलाज और वैक्सीनेशन में रुकावट न आए

पीएम मोदी (Pm Modi) ने अधिकारियों से राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय और प्लानिंग सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अस्पतालों में कोविड के उपचार और टीकाकरण में किसी भी तरह की रुकावट न आए। उन्होंने कहा कि चक्रवात के दौरान क्या करें और क्या न करें के बारे में सलाह और निर्देश प्रभावित जिलों के नागरिकों को समझने में आसान और स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराए जाएं।

24 मई को चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है

मौसम विभाग (IMD) ने कहा, ‘मध्य पूर्वी बंगाल की खाड़ी में रविवार को निम्न दबाव का क्षेत्र बना है। ये उड़ीसा के बालासोर और बंगाल के दीघा से 700 किलोमीटर की दूरी पर है। उम्मीद है कि 24 मई तक ये चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। 25 मई को बंगाल के मेदिनीपुर, 24 परगना और हुगली में हल्की बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की भी संभावना है। इसके बाद 26 मई को नादिया, बर्धमान, बांकुरा, पुरुलिया और बीरभूम में भारी बारिश हो सकती है।

मछुआरों को चेतावनी जारी की गई

मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की गई है। इसमें बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी-मध्य, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ओर 22 से 24 मई के बीच न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा 23 से 25 मई तक बंगाल की मध्य खाड़ी और 24 से 26 मई के बीच पश्चिम बंगाल समेत ओडिशा और बांग्लादेश के तटों की ओर जाने से मना किया है। साथ ही जो मछुआरे समुद्र के बीच में हैं, उन्हें लौटने की सलाह दी जा रही है।

तूफान के खतरे से निपटने के लिए भेजी गईं टीमें

नौसेना ने कहा कि तूफान के संभावित खतरे से निपटने के लिए बाढ़ राहत एवं बचाव की आठ टीमों के अलावा गोताखोरों की चार टीमों को ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भेजा गया है। कोस्ट गार्ड, डिजास्टर रिलिफ टीम (DRTs), इन्फ्लेटेबल बोट, लाइफबॉय और लाइफजैकेट, इसके अलावा डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा है। पोर्ट अथॉरिटी, ऑयल रिग ऑपरेटर्स, शिपिंग- फिशरीस अथॉरिटी और मछुआरे संघों को चक्रवात को लेकर जानकारी दे दी गई है।

लगातार मौसम पर रखी जा रही निगरानी

ICG के प्रवक्ता के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में मौसम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के अलावा अंडमान और निकोबार द्वीपों में आईसीजी रिमोट ऑपरेटिंग स्टेशन (ROS) की मदद से अलर्ट भेजे जा रहे हैं।

केंद्र ने 5 राज्यों को जारी की गाइडलाइन

  • इमरजेंसी कमांड सिस्टम और इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर और कंट्रोल रूम को तुरंत एक्टिव करें। नोडल अफसर तैनात करें और उसकी कॉन्टैक्ट डिटेल स्वास्थ्य मंत्रालय को उपलब्ध कराएं।
  • तटवर्ती राज्यों के सभी जिलों में हॉस्पिटल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान को शुरू कर दें। इन जिलों के अस्पतालों में आपातकालीन स्थितियों के लिहाज से तैयारियों का रिव्यू भी कर लिया जाए।
  • जो इलाके तूफान के रास्ते में आ रहे हैं, वहां के सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों से मरीजों की ऊंचाई वाले इलाकों के बड़े अस्पतालों में शिफ्टिंग का एडवांस प्लान तैयार कर लें।
  • कोविड मैनेजमेंट के लिए निगरानी यूनिट, स्वास्थ्य टीमों को भी महामारी के अलावा डेंगू, मलेरिया, सर्दी-खांसी, चेचक जैसी बीमारियों के लिए तैयार रहने को कहें।
  • तूफान प्रभावित इलाकों में सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में, इनमें कोविड सेंटर्स भी शामिल हैं, पर्याप्त मैन पावर होनी चाहिए। ये सभी केंद्र पूरी तरह से फंक्शनल होने चाहिए। मैन पावर की कमी को प्रभावित न होने वाले जिलों से पूरा कर लिया जाए।
  • प्रभावित इलाकों के अस्पतालों, लैब और वैक्सीन कोल्ड चेन, ऑक्सीजन प्रोडक्शन यूनिट और दूसरी सपोर्टिव मेडिकल फैसिलिटीज में पर्याप्त पावर बैकअप हो। इसके अलावा इन अस्पतालों में बिजली-पानी और ईंधन की भी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण आवागमन प्रभावित हो सकता है। इमरजेंसी को ध्यान में रखते हुए जरूरी दवाओं का स्टॉक पहले से जमा कर लें। ORS, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर और कोरोना के इलाज में लगने वाले दूसरे ड्रग की व्यवस्था कर ली जाए। कोविड और नॉन कोविड, दोनों तरह के अस्पतालों के लिए ये कदम जरूरी हैं।

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