कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आज रेल रोको अभियान, रेलवे ने तैनात की RPSF की 20 कंपनियां

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Webvarta Desk: Rail Roko, Rail Roko Andolan, रेल रोको अभियान: कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर सरकार और आंदोलनकारी किसानों (Farmers Protest) के बीच गतिरध बरकरार है। एक तरफ प्रदर्शनकारी किसान कानून (Kisan Kanun) वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं तो वहीं दूसरी सरकार संशोधन की बात कर रही है।

अपनी मांगो को पूरा न होते देख ये किसान अब सरकार के साथ आरपार के मूड में दिख रहे हैं। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने कहा है कि हमारा संघर्ष और तेज होगा। तीनों कानूनों (Farm Laws) के विरोध में किसान मोर्चा ने कहा कि आज देश भर में रेल रोको (Rail Roko) अभियान चलाया जाएगा।

किसान संगठनों की ओर से चार घंटे के लिए रेल रोको (Rail Roko) अभियान चलाया जाएगा। किसानों के इस आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। किसी भी अनहोनी की आशंका को देखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनत किए गए हैं। रेल रोको अभियान दोपहर 12 बजे से लकेर शाम के 4 बजे तक चलाया जाएगा। रेलवे की ओर से पंजाब, हरियाण, उत्त प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 20 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की है।

रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक, अरुण कुमार ने कहा, ‘मैं सभी से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। हम जिला प्रशासनों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और नियंत्रण कक्ष बनाएंगे।’

गौरतलब है कि राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने बुधवार को बताया कि नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ गुरुवार को देशभर में ट्रेनों के पहिए रोके जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक देशभर में ‘रेल रोको आंदोलन’ (Rail Roko Andolan) होगा। खास बात यह है कि पिछली बार हुए देशव्यापी ‘चक्का जाम’ से जिस तरह दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड को बाहर रखा गया था, इस बार ‘रेल रोको’ में किसी राज्य को छूट नहीं दी जाएगी। इसे देखते हुए रेलवे ने भी रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्से की 20 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की है।

टिकैत बोले- सरकार के फैसले से आम लोग परेशान

राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार पिछले 8 महीने से तमाम ट्रेनों को चलने की इजाजत ही नहीं दे रही है जबकि कई तरह की दूसरी बंदिशों को उसने हटा दिया है। इससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। उन्होने कहा कि गुरुवार को होने वाले ‘रेल रोको आंदोलन’ में गांवों के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा ने पिछले हफ्ते ‘रेल रोको आंदोलन’ करने का ऐलान किया था।

रेलवे ने की तैयारी, आरपीएसएफ की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात

किसानों के ऐलान के मद्देनजर रेलवे ने भी खास तैयारियां की है। देशभर में रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स की 20 अतिरिक्त कंपनियां यानी करीब 20 हजार जवान तैनात किए गए हैं। मुख्य फोकस पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर रखा गया है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के डायरेक्टर जनरल अरुण कुमार ने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘हम चाहते हैं कि किसान यात्रियों के लिए असुविधा पैदा न करें। हम चाहते हैं कि वे 4 घंटे शांति से बीत जाएं।’

‘चक्का जाम’ की तरह इस बार कुछ राज्यों को नहीं रहेगी छूट

किसान संगठनों का कहना है कि उन्हें ‘रेल रोको आंदोलन’ के लिए मजबूर होना पड़ा है जिसका मकसद सरकार पर कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव बनाना है। पंजाब के कीर्ति किसान यूनियन के प्रेस सचिव जितेंदर सिंह शीना ने हमारे सहयोगी टाइम्‍स ऑफ इंडिया को बताया कि ‘हम सभी रेलवे लाइनें ब्‍लॉक करेंगे, दिल्‍ली आने वाली भी।’ उन्‍होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरा आंदोलन योजना के मुताबिक हो। शीना ने कहा कि ‘रेल रोको आंदोलन’ का मकसद सरकार पर किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव बनाना है।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे अलर्ट

यात्रा कर रहे यात्रियों को ट्रेनों में कोई परेशानी ना हो। इसके लिए भी इंतजाम करने का दावा किया गया है। रेलवे की तरफ से आंदोलन को देखते हुए पश्चिम बंगाल से होकर आने जाने वाली ट्रेनों के मार्ग पर विशेष इंतजाम रखे गए हैं।

कुछ ऐसे कड़े हैं प्रावधान

आंदोलन के दौरान ट्रेनों के परिचालन को बाधित करना कानूनी तौर पर ठीक नहीं है।रेलवे की तरफ से इस संबंध में खड़े कानूनी प्रावधान है। रेलवे के संचालन में अगर कोई किसी तरह की बाधा डालता है तो उसके खिलाफ रेलवे ऐक्‍ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अगर ट्रेन पर किसी तरह का सामान फेंका जाए या पटरी को नुकसान पहुंचा तो दोषी को रेलवे ऐक्‍ट की धारा 150 के तहत उम्रकैद दी जा सकती है।

धारा 174 कहती है कि अगर ट्रैक पर बैठकर या कुछ रखकर ट्रेन रोकी जाती है तो दो साल की जेल या 2,000 रुपये के जुर्माने या फिर दोनों की सजा हो सकती है। रेलवे कर्मचारियों के काम में बाधा डालने पर, रेल में जबर्दस्‍ती घुसने पर धारा 146, 147 के तहत छह महीने की जेल या एक हजार रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

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