Saturday, September 24, 2022

Sri Lanka को कर्ज देकर किया तबाह, अब लोगों के दिमाग पर कब्जे की कोशिश में China, पूरा मामला जानें

वेबवार्ता: श्रीलंका को गंभीर आर्थिक संकट (Sri Lanka Crisis) में झोंकने वाला चीन (China) अब लोगों के दिमाग पर कब्जे की तैयारी में है। इसी कारण वह आक्रामक कूटनीति के जरिए स्थानीय मीडिया (China Influencing Sri Lankan Media) पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है।

यहां तक कि श्रीलंका का सरकारी मीडिया (China Influencing Sri Lankan Media) भी चीन के दबाव में खबरों को प्रसारित कर रहा है। इसका मकसद लोगों के बीच चीन को लेकर अच्छी छवि का निर्माण करना है।

2019-21 की कवरेज अवधि के दौरान श्रीलंकाई मीडिया पर चीन के कवरेज के प्रभाव स्पष्ट तौर पर देखे गए हैं। बड़ी संख्या में बीजिंग समर्थक इंफ्लूएंसर्स ने श्रीलंकाई सोशल मीडिया स्पेस में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है। ये लोग विशेष रूप से श्रीलंका के युवा आबादी तक अपनी पैठ बनाने और देश के थिंक टैंक को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।

श्रीलंका के नेता और उद्योगपति भी चीन के पक्ष में बना रहे माहौल

द आइलैंड ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में राजपक्षे परिवार की सत्ता में वापसी और 2022 में उन्हें बेदखल करने के विरोध ने प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और पत्रकारों पर हमलों को बढ़ा दिया। इस कारण स्थानीय मीडिया (China Influencing Sri Lankan Media) की पकड़ अपने ही देश में कमजोर पड़ गई है। इसी का फायदा चीन ने उठाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि श्रीलंकाई और चीनी सरकारों के बीच उच्च-स्तरीय संबंधों के कारण राजनेता और उद्योगपतियों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मंचों पर चीनी प्रॉपगैंडा को बड़े पैमाने पर खुद फैलाया है।

श्रीलंका की सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर चीन का कब्जा

श्रीलंका का सरकारी अखबार डेली न्यूज, नेशनल बिजनेस पेपर द डेली एफटी, कुछ एलीट क्लास के संचालित सांस्कृतिक संगठन और थिंक टैंक चीन के पक्ष में कंटेंट परोस कर देश में एक माहौल बना रहे हैं।

इसके अलावा, चीनी राजनयिकों ने वुल्फ वॉरियर वाली रणनीति अपनाई है, जो नियमित रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आलोचना करने वालों के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं। इतना ही नहीं, चीन ने श्रीलंका में बड़े पैमाने पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स भी खोले हैं। जो चीन विरोधी कंटेंट के खिलाफ खुद को श्रीलंकाई नागरिक बताकर उसका विरोध करते हैं।

सिंहली और तमिल में कंटेंट परोस रहा चीनी मीडिया

यहां तक कि, चाइना रेडियो इंटरनेशनल श्रीलंका की प्रमुख भाषा सिंहली में अपने प्रोग्राम को प्रसारित करता है। इसका प्रमुख लक्ष्य श्रीलंकाई दर्शकों तक चीन के पक्ष में माहौल का निर्माण करना है। यह सोशल मीडिया पर सिंहली और तमिल दोनों ही भाषाओं में उपलब्ध है। इसके सिंहली अकाउंट के तो 1.4 मिलियन फॉलोअर भी हैं।

श्रीलंका की आबादी और इंटरनेट यूज करने वाले लोगों की संख्या के हिसाब से इतने फॉलोअर बहुत ज्यादा हैं। विशेष रूप से 2020 के बाद से, चीनी राज्य मीडिया से जुड़े फेसबुक इंफ्लूएंसर्स ने सिंहली सहित स्थानीय भाषाओं में युवाओं को लक्षित करने वाली सामग्री को तेजी से आगे बढ़ाया है।

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