BRICS 2021 Summit: शी जिनपिंग भी ‘आएंगे’ भारत.. अचानक इतना याराना क्यों दिखा रहा चीन?

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Webvarta Desk: BRICS 2021 Summit: भारत-चीन सीमा (India China Standoff) पर करीब 11 महीनों तक भारी तनाव रहा। पहले पैंगोंग झील (Pangog Lake) और फिर अन्‍य जगहों से डिसइंगेजमेंट की रिपोर्ट्स के बीच, चीन के तेवर बदल गए हैं। उसकी बातों में अब ‘सहयोग’, ‘मानवता’ जैसे शब्‍द आने लगे हैं।

सोमवार को चीन ने यह कहते हुए भारत में होने वाले ब्रिक्‍स सम्‍मेलन (BRICS 2021 Summit) का समर्थन किया कि वह भारत और अन्‍य सदस्‍य देशों के साथ मिलकर ‘विभिन्‍न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करना’ चाहता है।

अगर अगले कुछ महीनों में कोविड महामारी से उपजीं परिस्थितियां काबू में आ गईं तो चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jingping) भी भारत आ सकते हैं। अगर वह आते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से उनकी मुलाकात भी संभव है। चीनी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि चीन ब्रिक्‍स को बेहद महत्‍व देता है और इसके जरिए रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने का पक्षधर है। चीन ने कहा कि वह ब्रिक्‍स देशों के बीच एकजुटता और सहयोग को मजबूत करना चाहता है।

‘संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहता है चीन’

सीमा पर जो हालात हैं, उसका सम्‍मेलन पर असर पड़ेगा या नहीं? इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता वांग वेनबिन ने कहा, “भारत के इस साल ब्रिक्‍स सम्‍मेलन का आयोजन का चीन समर्थन करता है। (चीन) भारत व अन्‍य ब्रिक्‍स देशों के साथ विभिन्‍न क्षेत्रों में संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहता है। अर्थव्‍यवस्‍था, राजनीति और मानवता के ‘तीन पहियों वाली पहल’ को भी मजबूत करना चाहता है।”

वांग ने कहा कि ‘ब्रिक्स वैश्विक प्रभाव वाले नए बाजार देशों और विकासशील देशों का सहयोग तंत्र है। इधर के कुछ सालों में ब्रिक्स देशों की एकजुटता बढ़ रही है, व्यवहारिक सहयोग गहरा हो रहा है और प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है, अब यह अंतरराष्ट्रीय मामले में एक सकारात्मक, स्थिर और रचनात्मक शक्ति बन गया है।’

भारत को इसी साल 2021 के लिए ब्रिक्‍स की अध्‍यक्षता मिली है और वह सम्‍मेलन अयोजित करेगा। 19 फरवरी को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्‍ली स्थित सुषमा स्‍वराज भवन में BRICS 2021 की वेबसाइट लॉन्‍च की थी।

रिश्‍तों पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू?

चीन ने ब्रिक्‍स देशों का सम्‍मेलन ऐसे वक्‍त में किया है जब सीमा पर उसकी सेना कदम पीछे खींच रही है। दोनों देशों के सैन्‍य कमांडर्स के बीच हुए समझौते के अनुसार, बॉर्डर पर तनाव से पहले वाली स्थिति बहाल करने की कोशिशें हो रही हैं।

हालांकि चीन के हर कदम को भारत बेहद सावधानी से देख रहा है। सामरिक क्षेत्र का असर व्‍यापारिक व राजनीतिक क्षेत्रों पर भी पड़ा है। चीन से आए विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश (FDI) के बड़े प्रस्‍तावों की बारीकी से जांच परख होगी। इसके लिए एक कोऑर्डिनेशन कमिटी भी बनाई गई है।

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