इजरायल-हमास और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच चीन से आई दुनिया को चौंकाने वाली खबर, US की खुफिया रिपोर्ट उड़ा देगी नींद

Bijing: एक तरफ इजरायल-हमास (Israel-Hamas) और दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) ने पहले से ही दुनिया को भीषण नुकसान और दहशत झेलने के लिए मजबूर किया है। इस बीच चीन के खतरनाक इरादों से दुनिया को एक और बड़ा सदमा लगने वाला है।

अमेरिकन इंटेलीजेंस की रिपोर्ट ने रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) और इजरायल हमास युद्ध (Israel-Hamas) के बीच चीनी हरकतों की जो रिपोर्ट लीक की है, उसके बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। चीन इन युद्धों के बीच कितनी खतरनाक साजिश रच रहा है, इसका शायद दुनिया को भलीभांति अंदाजा भी नहीं होगा। मगर अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कलई खोल दी है। यह रिपोर्ट पूरे विश्व को चौंकाने वाली है।

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय ‘पेंटागन’ ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि चीन पिछले अनुमानों की तुलना में तेजी से परमाणु हथियार शस्त्रागार का निर्माण कर रहा है। अब जरा सोचिए ऐसे वक्त में चीन को परमाणु शस्त्रागार निर्माण करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ गई, क्या चीन तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा है। क्या चीन दुनिया को विनाश के रास्ते पर ले जाने की तैयारी कर रहा है, आखिर चीन का इरादा क्या है?

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट तो फिलहाल चीन के खतरनाक इरादे को ही संकेत कर रही है। ताइवान का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ‘‘निश्चित रूप से’’ रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) से सबक लेकर यह कवायद कर रहा है। इस कड़ी में चीन के साथ उधर उत्तर कोरिया भी परमाणु  हथियारों का जखीरा बढ़ाने में लगा है। अब रूस के कदम भी उसी ओर बढ़ चले हैं।

नई अंतरमहाद्विपीय परमाणु मिसाइल के निर्माण में जुटा चीन

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि चीन संभवत: पारंपरिक हथियारों का उपयोग करके एक नयी अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल प्रणाली तैयार करने में जुटा है, जिसे यदि तैनात किया जाता है, तो बीजिंग ‘‘महाद्वीपीय अमेरिका, हवाई और अलास्का में लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।’’ यह रिपोर्ट अगले महीने सैन फ्रांसिस्को में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच अपेक्षित बैठक से पहले आई है। पेंटागन की इस रिपोर्ट का मकसद चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं का पता लगाना है, जिसे अमेरिकी सरकार क्षेत्र में अपने प्रमुख खतरे और देश की दीर्घकालिक सुरक्षा चुनौती के रूप में देखती है। ​